शामली में गैस रिसाव के कारण बच्चों की हालत बिगड़ने के साथ ही चिंता में अभिभावकों की हालत भी खराब हो गई। इस दौरान बच्चे अस्पताल में बिलखते रहे और परिजन उन्हें संभालने में लगे रहे। हालांकि इस बीच पुलिस ने अभिभावकों की काफी मदद की और बच्चों को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया।
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बिलखते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
अभिभावकों को जैसे ही हादसे की सूचना मिली तो वो अस्पताल की तरफ दौड़ पड़े। उन्होंने अपने-अपने बच्चों को बमुश्किल संभाला। कोई शहर के मोहल्ले से पहुंच रहा था, तो कोई दूर गांव से अपने बच्चे को लेने अस्पताल आया था।
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मंगलवार को हादसे के बाद आलम यह था कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य मार्ग पर महिलाएं दौड़ लगाती हुई नजर आ रही थी। हर महिला घबराई हुई थी और आंखों में पानी था।
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बदहवास हालत में महिलाएं अस्पताल में पहुंचकर अपने बच्चों को तलाश रही थीं। जैसे ही बच्चा सामने आया, तो उससे लिपटकर रोने तक लगी थीं। इस हालत को देखकर अस्पताल परिसर में मौजूद लोग भी द्रवित हो गए।
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दरअसल, सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल और बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र छात्राओं को हालत बिगड़ने पर सीएचसी शामली लाने के बाद उपचार दिलाया गया। बच्चों से नाम और मोबाइल नंबर मालूम करके अभिभावकों को सूचना दी गई थी। इसके चलते ही कुछ ही देर बाद अस्पताल परिसर अभिभावकों से भर गया था।
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वहीं, शामली सीएचसी से जिन बच्चों को गंभीर हालत के चलते तोमर नर्सिंग होम, शांति केयर हॉस्पिटल, अनंता हास्पिटल, लाइफ केयर हॉस्पिटल ले जाया गया था।
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सीएचसी में अभिभावकों को जब अपने बच्चे नहीं मिले, तो वह इन अस्पतालों में पहुंचने लगे थे। इस दौरान दयानंदनगर निवासी किरण और रेखा, गांव खंदरावली निवासी अदित शर्मा, खेडीकरमू निवासी राजेश, गांव करोडी निवासी सतीश और गांव बरला जट निवासी लाखन सिंह अपने बच्चों को तलाशते हुए मिले।