मुजफ्फरनगर दंगा 2013: फाइल फोटो
फ्लैश बैक 2013...
26 अगस्त : जानसठ कोतवाली के कवाल गांव में बाइक और साइकिल की भिड़ंत होने पर मुजस्सिम और शाहनवाज का गौरव से विवाद हुआ।
27 अगस्त : शाहनवाज से हुई कहासुनी के बाद मारपीट। सुआं लगने से शाहनवाज हुआ घायल। बाद में जानसठ अस्पताल में हुई मौत। शाहनवाज पक्ष ने गौरव और सचिन की पीट-पीटकर हत्या कर दी।
28 अगस्त : सचिन-गौरव के अंतिम संस्कार से लौटती भीड़ ने कवाल में घुसकर पथराव और आगजनी की। तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह एवं एसएसपी मंजिल सैनी का तबादला।
30 अगस्त : कवाल में हुई तोड़फोड़, पथराव एवं आगजनी के विरोध में खालापार में जुमे की नमाज के बाद दिया गया ज्ञापन। भड़काऊ भाषण एवं नारेबाजी।
31 अगस्त : खालापार में हुई सभा की प्रतिक्रिया में हिंदूवादी संगठनों ने सिखेड़ा के गांव नंगला मंदौड़ में की पंचायत।
07 सितंबर : नंगला मंदौड में दोबारा हुई महापंचायत से लौटते लोगों पर जगह-जगह किए गए हमले। जिले में जगह-जगह भड़का दंगा।
08 सितंबर: कुटबा-कुटबी व आसपास के क्षेत्र में भड़का दंगा, आठ लोगों की मौत।
09 सितंबर: एडीजी कानून व्यवस्था अरुण कुमार ने डाला डेरा। सेना की तैनाती।
10 सितंबर: कर्फ्यू में दो घंटे की ढील दी गई।
15 सितंबर: तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कर्फ्यू ग्रस्त इलाकों का दौरा करने पहुंचे। काले झंडे दिखाए गए। एसएसपी एससी दूबे सस्पेंड।
17 सितंबर: दिन में कर्फ्यू खोला गया। स्कूल-कॉलेज खुले।
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