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सीक्रेट फार्म हाउस का खुलासा होते ही थानाध्यक्ष ने नष्ट किए सबूत, इस ओर इशारा कर रही मौके से मिली ये चीजें

Thu, 01 Oct 2020 02:52 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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स्वीमिंग फूल - फोटो : अमर उजाला
आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर निर्माण कराया जाता है तो जेहन में ये सवाल जरूर आता है कि अमुक व्यक्ति कहीं अवैध कार्यों तो लिप्त नहीं है। ऐसे ही एक निर्माण पर अमर उजाला ने जांच पड़ताल की तो खाकी के काले कारनामों की पोल खुलती चली गई।

हस्तिनापुर के थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने सवार दो साल से एक ही थाने में जमे रहकर अकूत संपत्ति अर्जित की बल्कि अपने पद का दुरुपयोग भी किया।
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फार्म हाउस के एक कमरे में लगा एसी लाल घेरे में। अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
थानाध्यक्ष ने जिस तरह से घने जंगलों के बीच माॅडल काॅटेज, स्वीमिंग पूल आदि से लैस एक सीक्रेट फार्महाउस बनाया हुआ था, उससे खाकी पर सवाल उठने लाजिमी हैं।

यही नहीं बताया गया कि इस आलीशन इमारत का खुलासा होते ही थानाध्यक्ष ने सबूत मिटाने की कोशिश भी की है। इससे संभावना जताई जा रही है कि थानाध्यक्ष के इस सीक्रेट बंगले में कहीं अवैध कार्य तो नहीं किए जा रहे थे। आगे पढ़ें पूरी रिपोर्ट :-
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फार्म हाउस में बना कॉटेज - फोटो : अमर उजाला
ताला बंद करने के बाद कागजात जलाए
मंगलवार को अमर उजाला में धर्मेंद्र के फार्म हाउस का खुलासा होने के बाद वहां तैनात हस्तिनापुर थाने के सिपाही और होमगार्ड को थाने बुला लिया गया था। फार्म हाउस में ताला लगा दिया गया था। बुधवार को फार्म हाउस के बाहर कुछ जले हुए कागज देखे गए। लग रहा है जांच शुरू होने से पहले ही कुछ सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया गया है। 

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फार्म हाउस में बना शानदार कॉटेज। अमर उजाला - फोटो : अमर उजाला
थानाध्यक्ष ने द्रौपदी घाट के नजदीक घने जंगल में खेतों के बीच दो बीघा जमीन पर आलीशान फार्म हाउस बनवाया है। इसकी चौबीसों घंटे रखवाली के लिए थाने के एक सिपाही और एक होमगार्ड को भी तैनात किया गया है।

वहीं चर्चा है कि इस फार्म हाउस में अवैध कार्यों को भी अंजाम दिया जाता था। यहां चुनिंदा लोग पार्टियां करने पहुंचते थे, फार्म हाउस के आसपास पड़ी बिसलेरी आदि की बोतलें इस बात की गवाही दे रहीं थी।
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थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह - फोटो : Facebook from SO Dharmendra Singh
मलाईदार थानों से हटाए तो ड्यूटी ही नहीं की 
धर्मेंद्र की ज्यादातर पोस्टिंग मलाईदार थानों में ही रही है। कभी थानाध्यक्ष पद से हटाए गए तो वह थाने में ड्यूटी नहीं करते थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, धर्मेंद्र इंस्पेक्टर रैंक वाले थानों लिसाड़ी गेटए सरूरपुर व मवाना में लंबे समय तक तैनात रहे।

मेडिकल, परीक्षितगढ़ और हस्तिनापुर थाने का चार्ज भी उनके पास रहा है। धर्मेंद्र को मेरठ में दो बार थाने के चार्ज से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया। लाइन में जाते ही सत्ताधारी नेता की सिफारिश पर फिर कोई न कोई थाना दे दिया जाता था। 
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फार्म हाउस की ओर जाने वाला रास्ता - फोटो : अमर उजाला
एसओ और विधायक की नजदीकी से बढ़ी भाजपा की मुसीबत
खाकी और खादी का गठबंधन कभी कभी सत्तारूढ़ पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन जाता है। सवा दो साल तक हस्तिनापुर के थानाध्यक्ष रहे धर्मेंद्र ने स्थानीय विधायक दिनेश खटीक की करीबी में ऐसा खेल खेला कि पूरे मामला शासन तक पहुंच गया है। धर्मेंद्र को हस्तिनापुर विधायक का संरक्षण प्राप्त था। तभी तमाम शिकायतों के बावजूद आला अधिकारी उन्हें हटा नहीं पाए।
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थानाध्यक्ष का फाइल फोटो वे जंगल में बना सीक्रेट फार्म हाउस - फोटो : amar ujala
खादर क्षेत्र में जमीन पर कब्जों, कच्ची शराब की भट्टियांए रेत खनन के साथ ही सरकंडों की तस्करी खुलकर होती रही। शिकायतों पर कार्रवाई शून्य रही। अब मामला खुलने के बाद भाजपा की जमकर फजीहत हो रही है। सत्ता पक्ष के नेता और जनप्रतिनिधि डैमेज कंट्रोल का प्रयास कर रहे हैं। 

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meerut police - फोटो : अमर उजाला
भाजपा की गुटबाजी फिर उजागर  
भाजपा के सांसद, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व जिलाध्यक्ष ने पुलिस पर हल्ला बोला, लेकिन विधायक पर लगे आरोपों पर किसी ने भी बचाव नहीं किया। जिले के चार विधायकों ने अलग गुट बना रखा था। अधिकारियों पर दबाव बनाने को चारों एक साथ जाते थे। 
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एसपी देहात अविनाश पांडेय व विधायक दिनेश खटीक - फोटो : अमर उजाला
राजनीति में घसीटा जा रहा है मेरा नाम  
मेरा मामले से कोई लेना-देना नहीं है। थानाध्यक्ष की नियुक्ति एसएसपी करते हैं। वह जब चाहें, उसे हटा सकते थे। टिकट की चाह रखने वाले कुछ लोग मेरा नाम बेवजह घसीट रहे हैं। -दिनेश खटीक, विधायक, हस्तिनापुर
 
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