खेती-किसानी में पहचान रखने वाले पश्चिमी उप्र से खेल प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के झंडे गाड़ रहीं हैं। बीते 74 सालों में हॉकी, क्रिकेट, कुश्ती, एथलेटिक्स, शूटिंग से लेकर विभिन्न खेलों में खिलाड़ियों ने अपना परचम लहराया है। क्रिकेट में भुवनेश्वर कुमार, प्रियम गर्ग, कर्ण शर्मा, एथलेटिक्स में प्रियंका गोस्वामी, सीमा अंतिल, अन्नू रानी, पारुल चौधरी, शूटिंग में शहजर रिजवी, सौरभ चौधरी, शपथ भारद्वाज, शार्दूल विहान, कुश्ती में अलका तोमर को आदर्श मानकर यहां युवा खिलाड़ियों की की फौज तैयार हो रही है।
भुवनेश्वर बने नए स्विंग मास्टर
मेरठ के प्रवीण कुमार ने स्विंग को अंतरराष्ट्रीय फलक पर नई पहचान दी थी। उनके बाद युवा क्रिकेटर भुवनेश्वर कुमार ने स्विंग का जादू कायम रखा। गंगानगर सी-पॉकेट निवासी भुवी ने आईपीएल में जबरदस्त गेंदबाजी कर अलग जगह बनाई है। आज उनका नाम प्रतिष्ठित क्रिकेटरों में शुमार है।
पैदल चाल में प्रियंका के नाम नेशनल रिकॉर्ड
माधवपुरम सेक्टर-3 निवासी 26 वर्षीय एथलीट प्रियंका गोस्वामी 10 व 20 किमी. पैदल चाल की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में 20 से ज्यादा पदक अपने नाम कर चुकी हैं। नेशनल रिकॉर्ड के साथ टोक्यो ओलंपिक में प्रतिभाग के बाद वो एशियन गेम्स के लिए बंगलुरू साई सेंटर में पसीना बहा रही हैं।
कम उम्र में तय किया ओलंपिक का सफर
कलीना निवासी 19 वर्षीय शूटर सौरभ चौधरी 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के गोल्डन ब्वॉय कहे जाते हैं। यूथ ओलंपिक, आईएसएसएफ वर्ल्डकप, वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में 21 पदक जीत चुके हैं। इनमें 14 स्वर्ण, 5 रजत व 2 कांस्य हैं। सौरभ टोक्यो ओलंपिक में पदक के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
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annu rani, अन्नू रानी-भाला फेंक
- फोटो : social Media
कद छोटा और इरादे बड़े
सरधना के बहादरपुर गांव निवासी अन्नू रानी एशियन गेम्स में पदक के साथ 2014 कॉमनवेल्थ में प्रतिभाग कर चुकी हैं। वर्ल्ड चैम्पियनशिप में जाने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। ओलंपिक तक का सफर तय किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला खिलाड़ियों का कद 6 फीट से भी ऊपर है, लेकिन अन्नू रानी ने 5 फीट के सामान्य कद से उम्मीदों को सातवें आसमान की उड़ान दी।
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रूपल चौधरी, एथलेटिक्स
- फोटो : amar ujala
रूपल बनीं एथलेटिक्स में उम्मीद
रोहटा रोड निवासी 18 वर्षीय रूपल एथलेटिक्स में नई उम्मीद की किरण हैं। वह सात राष्ट्रीय स्तर के पदक अपने नाम कर चुकीं हैं। जून में होने वाले एशियन गेम्स ट्रायल्स की तैयारी में जुटी हैं। 22 अप्रैल को उन्होंने लखनऊ में 400 मी. दौड़ में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीता।
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vandana katariya
- फोटो : Amar Ujala Meerut
तीन दशक तक हॉकी में छाए मेरठी
70, 80 व 90 के दशक में मेरठ की हॉकी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त धूम मचाई। हॉकी खिलाड़ी एमपी सिंह, रोमियो जेम्स, स्व. हरिप्रसाद, चार सगे भाई आनंद चतुर्वेदी, हेमप्रकाश चतुर्वेदी, प्रेमप्रकाश चतुर्वेदी और प्रमोद चतुर्वेदी, प्रवीण शर्मा सहित 20 से ज्यादा खिलाड़ियों ने मेरठ को पहचान दी।
मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का डिजाइन
- फोटो : अमर उजाला
सरकार को सुविधाएं देने पर किया मजबूर
टोक्यो ओलंपिक में शामिल होने वाले उप्र के 11 खिलाड़ियों में नौ वेस्ट यूपी से थे। मेरठ के 5 खिलाड़ी थे। 74 सालों में पहली बार ओलंपिक में मेरठ की यह बड़ी भागीदारी रही। खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा के दम पर प्रदेश सरकार को सुविधाएं देने को मजबूर कर दिया। इसके चलते सरधना के सलावा में 700 करोड़ की लागत से उप्र का पहला मेजर ध्यानचंद खेल विवि बन रहा है। वहीं स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय स्तरीय शूटिंग रेंज का निर्माण जारी है।