कहते हैं कि अगर इंसान में इच्छाशक्ति हो तो कड़वी बातों को भी हौसला बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है 19 वर्षीय ताइक्वांडो खिलाड़ी चौधरी शिवांग सिंह ने।
वह महज नौ साल के थे जब स्कूल कोच ने टीम में शामिल नहीं किया और तंज कसा कि ‘यह खेल तुम्हारे बस का नहीं है।’ इन चुभने वाले शब्दों से वह मायूस तो हुए, मगर हौसला नहीं खोया। कड़ी मेहनत की और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। सोने के कई तमगे जीते और अब एशियन गेम्स में गोल्ड लाने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं।
शिवांग रोहटा रोड स्थित डालमपुर गांव के साधारण किसान परिवार से हैं। शिवांग के पिता विनय चौधरी एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। इनका परिवार अब मोदीपुरम की एटूजेड कालोनी में रहता है। शिवांग को बचपन से ही ताइक्वांडों का शौक था। साल 2013 में अलीगढ़ के एक स्कूल से जिले के लिए ताइक्वांडो टीम का चयन हो रहा था। तब कोच ने उसे डांटते हुए कहा कि यह खेल तुम्हारे बस का नहीं है।