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हुनर से देश को दिलाए मेडल, अब फावड़ा चलाने को मजबूर हुए हाथ, भावुक कर देगी तीरंदाज बेटी की ये कहानी

Sat, 10 Oct 2020 07:19 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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archer manisha gagat - फोटो : amar ujala
कहते हैं संघर्ष का नाम ही जिंदगी है लेकिन इसे सरकार की नजरअंदाजी ही कहा जाएगा कि देश और प्रदेश स्तर पर तीरंदाजी में ढेरों मेडल जीतने वाली मेरठ की मनीषा गागट आज लड़कों की तरह फावड़ा मजदूरी करने को मजबूर हैं।

20 वर्षीय मनीषा की इन दो तस्वीरों पर गौर कीजिए, एक तरफ हाथों में देश और प्रदेश के लिए तीरंदाजी में जीते हुए ढेरों पदक और गौरवमयी मुस्कान लिए खड़ी हैं, तो दूसरी तरफ हाथों में सीमेंट से भरा भारी तसला सिर पर रखे मजदूरी में अपने पिता की मदद कर रही हैं। सरकार की अनदेखी और आर्थिक तंगी ने उन्हें इन हालातों का सामना करने पर मजबूर कर दिया है। उनकी कहानी किसी के लिए भी प्रेरणादायक हो सकती है-
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मजदूरी करती मनीषा गागट - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में रोहटा रोड फाजलपुर गांव निवासी मनीषा गागट प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई मेडल भी जीत चुकी हैं लेकिन अब खराब आर्थिंक हालातों ने उन्हें मजदूरी करने पर मजबूर कर दिया है। आज वह लड़कों की तरह फावड़ा चलाती हैं, सीमेंट से भरे भारी तसले उठाती हैं। यही नहीं हालात यह हैं कि अब उनके तीरंदाजी को छोड़ने की नौबत तक आ गई है।

 
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जीते ये अवार्ड - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में मनीषा ने खूब पदक जीते लेकिन अपने लिए धनुष बाण खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। पिता चौकीदार की नौकरी करते थे जो लाॅकडाउन के कारण छूट गई और परिवार पर खाने के भी लाले पड़ गए। अब वह अपने पिता के साथ मजदूरी करने जाती हैं और जमकर मेहनत मजदूरी करती हैं।

 

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एडवोकेट राम कुमार ने दिये 11 हजार रुपए - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि तीन भाई.बहनों में सबसे छोटी मनीषा 2015 से तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। वो राज्य स्तर पर एक स्वर्णए चार रजतए चार कांस्य पदक जीत चुकी हैं।

ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी खेलो इंडिया में कांस्य पदक, जूनियर व सीनियर नेशनल और यूथ खेलो इंडिया में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं। मनीषा ने कैलाश प्रकाश स्टेडियम की कोच रहीं अनुपमा के धनुष से तीरंदाजी सीखना शुरू किया था। 
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मजदूरी को मजबूर राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज मनीषा गागट - फोटो : अमर उजाला
दो साल तीरंदाजी सीखने के बाद वह स्नातक के लिए गुरुनानक देव विवि अमृतसर चली गईं। वहां पढ़ाई के साथ विवि ने धनुष भी मुहैया कराया। स्नातक पूरा होने वाला है। ऐसे में धनुष भी विवि में जमा हो जाएगा। मनीषा अपने खेल से बेहद प्यार करती हैं। उन्हें लग रहा है कि आर्थिक समस्या के कारण उनका खेल छूट जाएगा।  

साइकिल से जाती हैं स्टेडियम
रोहटा रोड से करीब आठ किलोमीटर साइकिल चलाकर मनीषा स्टेडियम पहुंचती हैं। इन हालातों में भी वो सुबह और शाम स्टेडियम जाती हैं। वहां साथियों के धनुष से अभ्यास करती हैं। स्टेडियम में भी टारगेट की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है।
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एडवोकेट राम कुमार ने दिये 11 हजार रुपए - फोटो : अमर उजाला
तीरंदाज मनीषा की खबर प्रकाशित हुई तो स्वामी प्रसाद मौर्य यूथ बिर्गेड मेरठ के पदाधिकारियों ने मनीष गागट के घर फाजलपुर खटीकपुरा  जाकर 15,000 की आर्थिक मदद की।

मौर्य यूथ बिर्गेड के जिलाप्रभारी अनिल मौर्य ने बताया आज सुबह अमर उजाला अखबार में खबर पढ़कर टीम ने माननीय कैबीनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य जी को मनीषा की समस्या से अवगत कराया। मंत्री जी मनीषा को जल्द ही सरकारी मदद दिए जाने आश्वासन दिया।तीरंदाज मनीषा को निम्बस बुक स्टोर पर एडवोकेट रामकुमार ने भी मनीषा की आर्थिक मदद की।
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एडवोकेट राम कुमार ने दिये 11 हजार रुपए - फोटो : amar ujala
प्रतियोगिता और पुरस्कार
  • 2020 में भुवनेश्वर में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में कांस्य पदक।
  • 2018.19 में सोनभद्र में आयोजित स्टेट चैम्पियनशिप में अलग-अलग वर्ग में नौ पदक।
तीरंदाज खिलाड़ी मनीषा गागट की खबर प्रकाशित हुई तो पिता ने नाराजगी जताई और बेटी से मजदूरी पर जाना छुड़वाया, बोले बेटी है, लड़के मजदूरी करते अच्छे लगते हैं। वहीं एडवोकेट राम कुमार ने बेटी की मदद का दिया आश्वासन। कहा केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू तक  मामले को पहुंचाएंगे । अमर उजाला की खबर को खेल मंत्रालय को ट्वीट किया ।
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