कहते हैं संघर्ष का नाम ही जिंदगी है लेकिन इसे सरकार की नजरअंदाजी ही कहा जाएगा कि देश और प्रदेश स्तर पर तीरंदाजी में ढेरों मेडल जीतने वाली मेरठ की मनीषा गागट आज लड़कों की तरह फावड़ा मजदूरी करने को मजबूर हैं।
20 वर्षीय मनीषा की इन दो तस्वीरों पर गौर कीजिए, एक तरफ हाथों में देश और प्रदेश के लिए तीरंदाजी में जीते हुए ढेरों पदक और गौरवमयी मुस्कान लिए खड़ी हैं, तो दूसरी तरफ हाथों में सीमेंट से भरा भारी तसला सिर पर रखे मजदूरी में अपने पिता की मदद कर रही हैं। सरकार की अनदेखी और आर्थिक तंगी ने उन्हें इन हालातों का सामना करने पर मजबूर कर दिया है। उनकी कहानी किसी के लिए भी प्रेरणादायक हो सकती है-