नाग यज्ञ रुकवाने वाले आस्तिक ऋषि का मठ और पुजारी
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जानिए क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी
महाभारत की कथा में आता है कि राजा परीक्षित एक बार शिकार के लिए निकले थे और जल की खोज में वे शमीक ऋषि के आश्रम में पहुंच गए। उन्होंने तपस्या में लीन ऋषि से पानी मांगा। तपस्यारत ऋषि के ध्यान न देने पर उन्होंने पास में पड़ा मृत सांप बाण की नोक से उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया। तपस्या में लीन ऋषि को तो इस घटना का पता नहीं चला, किंतु उनके पुत्र श्रृंगि ऋषि ने घटना का पता लगते ही परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन उन्हें तक्षक सर्प डंसेगा।