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कवाल कांड में 5 साल बाद इंसाफ... एक क्लिक में पढ़ें शुरू से आखिरी तक का अपडेट

Fri, 08 Feb 2019 08:00 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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एडीजे कोर्ट संख्या-सात ने कवाल कांड में मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के केस में सभी सात हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश हिमांशु भटनागर ने सभी हत्यारों पर 14 लाख 84 हजार रुपये जुर्माना भी किया है।
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पांच साल चली सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायालय संख्या-7 ने शुक्रवार शाम करीब 3.20 बजे बहुप्रतीक्षित कवाल के दोहरे हत्याकांड का फैसला सुनाया। सभी सात हत्यारों को छह फरवरी को दोषी करार दिया था। फैसले को लेकर शुक्रवार को सुबह से भी कचहरी परिसर में भारी भीड़ थी। पूर्वाह्न 11.45 बजे सभी मुजरिम कोर्ट में पेश किए गए। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की सजा के प्रश्न पर 18 मिनट बहस चली। तीन घंटे के अंतराल के बाद न्यायाधीश हिमांशु भटनागर ने फैसला सुनाया।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र कुमार त्यागी, आशीष त्यागी और वादी के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि अदालत ने सचिन और गौरव के हत्या के मामले में सभी सातों हत्यारोपियों मुजस्सिम और उसके भाई मुजम्मिल, फुरकान, जहांगीर और उसके भाई नदीम, अफजाल और उसके भाई इकबाल निवासी कवाल को उम्र कैद की सजा सुनाई है। मुजरिमों पर 14 लाख 84 हजार का अर्थदंड लगाया है, जिसमें प्रत्येक पर अलग-अलग धाराओं में कुल 2.12 लाख का जुर्माना किया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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अदालत ने अर्थदंड की धनराशि में से 80 प्रतिशत की राशि मृतकों के परिजनों को अदा करने का आदेश दिया है। सजा सुनाए जाने के बाद सभी मुजरिमों को कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया गया।
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यह था मामला
जानसठ कोतवाली क्षेत्र के गांव कवाल में 27 अगस्त, 2013 को गौरव और सचिन की पीट पीट कर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले सचिन और गौरव के साथ हुई मारपीट में घायल शाहनवाज जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इसी मामले को लेकर मुजफ्फरनगर में दंगा भड़का था।
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इस तरह से आगे बढ़ी जांच
गौरव के पिता रविंद्र सिंह ने 27 अगस्त, 2013 को दोपहर 2.45 पर जानसठ कोतवाली में इस दोहरे हत्याकांड की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एसआई शाहिद अली ने उनका पंचनामा भरा था। घटना के समय जानसठ के प्रभारी निरीक्षक रहे शैलेंद्र शर्मा ने केस की विवेचना शुरू की। उसके बाद एसआईसी के विवेचक संपूर्णानंद तिवारी ने हत्याकांड की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। 15 अप्रैल, 2014 को चर्चित केस में कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से घटनाक्रम की पुष्टि
मृतकों का पोस्टमार्टम तीन डाक्टरों के पैनल ने शवों का  पोस्टमार्टम किया था। डाक्टरों के पैनल को सचिन के शरीर पर 17 और गौरव के जिस्म पर 15 निर्मम घाव मिले थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुख्ता साक्ष्य साबित हुई। जिनसे साबित हुआ कि वीभत्स तरीके से इनकी हत्या की गई।

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वादी पक्ष ने पेश किए दस गवाह
वादी पक्ष के 10 और बचाव पक्ष के छह गवाह पेश हुए। वारदात में दूसरे पक्ष के मृतक शाहनवाज के पिता सलीम ने जो कोर्ट में बयान दिया था, उसमें सचिन और गौरव की कवाल में मौजूदगी दिन के 12 बजे दिखाई थी। वादी पक्ष की ओर से कोर्ट में भारतीय इंटर कॉलेज नंगला मंदौड़ के शिक्षक दिनेश कुमार की गवाही कराई गई। उनके मुताबिक कक्षा 12 का छात्र गौरव घटना के दिन 12.30 बजे तक क्लासरूम में था।
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बरामदगी भी रही अहम
गोली और धारदार हथियार का हत्यारोपियों ने कोई प्रयोग नहीं किया था, बल्कि लाठी-डंडों, सिर और मुंह को पत्थरों से कुचलने के साथ सरिये से मार-मारकर मौत के घाट उतार दिया था। पुलिस ने मुजस्सिम से लोहे की रॉड और नदीम, जहांगीर और फुरकान से लाठी की बरामदगी दिखाई थी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त सामान को कोर्ट में प्रस्तुत किया।

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