ईहा दीक्षित
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दिल टूटा, रोई, लेकिन हार नहीं मानी
ईहा की मम्मी अंजली बताती हैं, इतनी छोटी सी बच्ची हर संडे खुद गड्डा बनाकर पौधा लगाती। इसे देखकर लोग सराहना तो करते लेकिन साथ देने नहीं आए। 2018 में हमने इसके क्लब ग्रीन ईहा स्माइल क्लब को शुरू कराया। तब क्लब के साथ पौधे लगने लगे। धीरे-धीरे कुछ बच्चे हमसे जुड़े। अभी छह बच्चे क्लब से जुड़े हैं। सभी ईहा से बड़े हैं। हमने किसी से संपर्क नहीं किया। ये बच्चे खुद ही दूर दूर से हमसे मिलने आए और क्लब से जुडे़। बच्चे खुद रविवार को पौधे लगाने आते हैं। कई बार जहां इन बच्चों में पौधे लगाए बाद में देखा तो वो पौधे लोगों ने उखाड़ दिए, आवारा पशु उन्हें खा गए। अपना लगाया पौधा जब उजड़ा देखा तो ईहा बहुत रोती थी। हम उसे समझाते कि बेटा काम करते रहो। आपके काम को सराहा जाए जरूरी नहीं, यह सब सहना पड़ता है। क्लब में अभी दो भाई सागर और रॉबिन सिंह, अभिषेक प्रजापति, पूजा सिंह, शुभम मिश्रा जुड़े हैं।