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Meerut: सुबह और रात को फैलने लगी स्मॉग की चादर, होने लगी आंखों में जलन, फूलने लगीं सांसे

Tue, 01 Nov 2022 12:09 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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स्मॉग - फोटो : amar ujala
स्मॉग करने लगा वार...सावधान न रहे तो हो जाएंगे बीमार....जी हां हम बात कर रहें है  मेरठ की जहां सुबह और रात को स्मॉग की चादर फैलने लगी है। जिससे आंखों में जलन और सांस के रोगियों की सांसे फूलने लगी हैं।

स्मॉग से हो सकती हैं ये समस्याएं
आंखों में जलन, श्वास संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनावए अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी बीमारियां। 

सामान्यत: वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 0 से 50 के बीच ही होना चाहिए, लेकिन यह लगातार खराब स्थिति में है। पिछले 10 दिनों में तीन बार 300 से ज्यादा, चार बार 25 से अधिक और तीन बार 225 से अधिक रहा है। नतीजतन, जहरीली हवा लोगों के फेफड़ों में पहुंच रही है। ऐसा ही रहा तो सेहत के लिए यह बहुत खतरनाक होगा।

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मेरठ में एयर क्वालिटी इंडेक्स दीपावली की रात में सबसे ज्यादा 380 तक पहुंच गया था। पिछले दो दिन से एयर क्वालिटी इंडेक्स 250 से अधिक है। आशंका है कि आने वाले दिनों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 तक पहुंच सकता है, लिहाजा सावधान रहने की जरूरत है। 
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meerut smog - फोटो : अमर उजाला
आमतौर पर जब ठंडी हवा किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर पहुंचती है तब स्मॉग बनता है। स्मॉग में पानी की बूंदों के साथ धूल और हवा में मौजूद जहरीले तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और ऑर्गेनिक कंपाउंड मिलकर नीचे की तरफ  गहरी परत बना लेते हैं।
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मेरठ स्मॉग - फोटो : amar ujala
सर्दियों के दौरान ट्रैफिक और तापमान के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और हवा की गति कम होती है। यह धुआं और धुंध को एक जगह स्थिर होकर स्मॉग को बनाती है और धरती के समीप जहां लोग सांस ले रहे हैं, वहां अधिक प्रदूषण को बढ़ा देती है। इससे दृश्यता बाधित होती है और पर्यावरण को भी अस्त-व्यस्त कर देती है।

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smog in Meerut - फोटो : अमर उजाला
पिछले 10 दिन का मेरठ का एयर क्वालिटी इंडेक्स
तारीख             एक्यूआई 
22 अक्तूबर      318
23 अक्तूबर      270
24 अक्तूबर      380
25 अक्तूबर      280
26 अक्तूबर      243
27 अक्तूबर     316
28 अक्तूबर     248
29 अक्तूबर     268
30  अक्तूबर    230
31 अक्तूबर      251
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सड़क पर छाई धुंध की चादर - फोटो : अमर उजाला
ये हैं एक्यूआई के मानक 
0 से 50: वायु शुद्ध है। 
51 से 100: वायु की शुद्धता संतोषजनक।  
101 से 200: न ज्यादा अच्छी, न बहुत अधिक खराब। 
201 से 300: वायु खराब है। 
301 से 400: वायु बेहद खराब है। 
401 से 500: स्थिति बहुत गंभीर है।
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सुबह छाया घना कोहरा - फोटो : अमर उजाला
अस्थमा के मरीजों को ज्यादा खतरा ज्यादा 
सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि स्मॉग से खांसी, गले और छाती में संक्रमण आदि बीमारियां हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा है उनके लिए यह काफी खतरनाक है। ऐसे लोगों को स्मॉग के दौरान घर से निकलने से बचना चाहिए। यह अस्थमा, साइनस और एलर्जी वालों मरीजों के लिए उत्प्रेरक का काम करती है। ये कण फेफड़े में चले जाते हैं। इसके लिए प्रदूषण भी काफी हद तक जिम्मेदार है।

फैल जाते हैं नए तरह के वायरस 
जिला अस्पताल के ईएनटी डॉ. बीपी कौशिक ने बताया कि स्मॉग के कारण सांस लेने में दिक्कत होने पर कई तरह की परेशानियां होती हैं। बुखार होने का खतरा भी बना रहता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, सांस के मरीजों के लिए ये कण ज्यादा नुकसानदेह हैं। इस तरह के मौसम में नए वायरस फैल जाते हैं, जो लोगों को कई तरह की बीमारियां देते हैं। ओपीडी में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
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क्षेत्र में फैली धुंध। - फोटो : अमर उजाला
      ये सावधानियां बरतें
  • अल सुबह और शाम के समय टहलने से बचें
  • कमरे में एग्जॉस्ट चलाएं
  • घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रुमाल या मास्क लगा लें
  • पेय पदार्थ ज्यादा लें, खासकर गर्म पेय पदार्थ
  • घरों की खिड़कियां या दरवाजें बंद रखें
  • कोई परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
  • हरी सब्जियों व पौष्टिक आहार का सेवन करें 
  • धूम्रपान को ना कहें।
  • बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ  करें। हो सके तो भाप लें।
  • अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर और नियमित लें। 
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