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PHOTOS: पूर्व मंत्री याकूब की फैक्टरी में खूब होता रहा भ्रष्टाचार, सोते रहे अफसर, अब खुला ऐसा राज, हर कोई हैरान

Fri, 01 Apr 2022 05:26 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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याकूब की फैक्टरी में एमडीए की कार्रवाई। - फोटो : amar ujala
भ्रष्टाचार की इससे ज्यादा इंतहा नहीं हो सकती। पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी की फैक्टरी में सील लगी थी लेकिन, इसके बाद भी यहां बिजली कनेक्शन चलता रहा। बिजली कभी कट जाती तो कभी बिल जमा होने पर कनेक्शन फिर से जोड़ दिया जाता। तीन महीने तक ये खेल चलता रहा। किसी ने ये तक देखने की जरूरत नहीं समझी कि जहां पर कनेक्शन चल रहा है वहां आखिर काम क्या हो रहा था। इसी खेल की आड़ में अवैध मीट फैक्टरी चलती रही। पुलिस भी आती-जाती गाड़ियों को नहीं देख पाई। ये सारा खेल तमाम विभागों की सांठगांठ की तरफ इशारा कर रहा है।
  
एसपी देहात केशव कुमार ने बताया कि जांच में फैक्टरी के जनवरी से चलने की बात सामने आ रही है। पकड़े गए 10 आरोपियों ने भी स्वीकार किया है कि वे यहां कई महीने से काम कर रहे थे। दिसंबर 2021 से लेकर 23 मार्च 2022 तक बिजली कनेक्शन काटने और जोड़ने का खेल लगातार चलता रहा।
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याकूब की फैक्टरी में छापा। - फोटो : amar ujala
बिजली बिल का बकाया जमा नहीं होने पर पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी कनेक्शन काट जाते और बिल जमा होने पर फिर से जोड़ देते।
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हाजी याकूब की फैक्टरी में छापा। - फोटो : amar ujala
वहीं, पावर कॉरपोरेशन के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार ने बताया कि 39 सौ केवी का फैक्टरी में कनेक्शन है, करीब 50 लाख रुपये का बकाया होने पर दिसंबर 2021 में कनेक्शन काट दिया था। बिल का भुगतान होने पर जनवरी में जोड़ दिया गया। 

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याकूब की फैक्टरी में छापा। - फोटो : amar ujala
इसके बाद जनवरी और फरवरी का बिल बकाया होने पर 21 मार्च को फिर से कनेक्शन काटने को नोटिस दिया और 23 को फिर से कनेक्शन काट दिया। करीब 30 लाख रुपये भुगतान होने के बाद कनेक्शन जोड़ दिया गया। सवाल यही है कि जब एमडीए सील लगा चुका था तो फिर कनेक्शन कैसे दे दिया गया। 
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हाजी याकूब कुरैशी। - फोटो : amar ujala
एमडीए, बिजली, प्रशासन और पुलिस... सबका तंत्र फेल
हर महीने इतना मोटा बिजली का बिल आने के बाद भी सारे अधिकारी सोते रहे। किसी ने ये देखने की जरूरत नहीं समझी कि आखिर फैक्टरी में क्या चल रहा है। 
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हाजी याकूब की फैक्टरी - फोटो : amar ujala
फैक्टरी में मीट आकर पैक होता रहा। गाड़िया आती-जाती रहीं लेकिन, खरखौदा पुलिस ने भी कुछ देखने की जरूरत नहीं समझी। एमडीए के अधिकारी भी जहां एक घर की दीवार बनाने पर उसे तोड़ने पहुंच जाते हैं, वे इतने दिनों तक चुप्पी साधे बैठे रहे।
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