हाजी याकूब की फैक्टरी
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फैक्टरी में मीट आकर पैक होता रहा। गाड़िया आती-जाती रहीं लेकिन, खरखौदा पुलिस ने भी कुछ देखने की जरूरत नहीं समझी। एमडीए के अधिकारी भी जहां एक घर की दीवार बनाने पर उसे तोड़ने पहुंच जाते हैं, वे इतने दिनों तक चुप्पी साधे बैठे रहे।