मौके पर जांच करती पुलिस
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तनाव पर काबू नहीं कर पा रहे लोग
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने बताया कि बढ़ते अपराधों का कारण भी कहीं न कहीं तनाव है, जिस पर लोग काबू नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसी चीज की पूर्ति न होने पर किसी भी इंसान जरूरत से अधिक सोचने लगता है।
संसाधनों को हासिल करने की प्रतियोगिता में शामिल मनुष्य स्वयं संसाधनों में बदलने लगा है। सबकुछ हासिल करने की होड़, हासिल चीज को बनाए रखने का दबाव, न हासिल कर पाने की छटपटाहट और हताशा। अक्षमता की अनुभूति से उत्पन्न हुई हीनता, परस्पर संबंधों में विकृति और बिखराव। मानसिक, सामाजिक अथवा वातावरण जन्य दबावों से उपजे तनाव की चपेट में आता मनुष्य अपराध भी कर डालता है।