पिता पुत्री का फाइल फोटो
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पांच बच्चे, खुद जोगेंद्र और उसकी पत्नी। गृहस्थी के इस बोझ में जोगेंद्र के कंधे झुकते जा रहे थे। तीन बेटियां व दो बेटे धीरे-धीरे बड़े हो रहे थे। दिन-ब-दिन परिवार का खर्च बढ़ रहा था और जोगेंद्र की फिक्र भी।
सबसे बड़ी बेटी खुशी पढ़ने में अच्छी थी। उसने बुलंदियां छूने का सपना देखना शुरू कर दिया था, लेकिन बाप की गरीबी आड़े आ रही थी।
बिटिया अपने बाबुल से रोज दाखिले की जिद करती और बेचारा बाप दाखिले की बजाए महज दिलासा देकर अपने दिल पर पत्थर रख लेता। बृहस्पतिवार को जोगेंद्र का सब्र जवाब दे गया। नतीजतन, दोनों बाप-बेटी ने मौत का घूंट पीकर गरीबी से निजात पा ली।