आनंद अस्पताल
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उन्होंने एक तरफ जहां अस्पताल की जिम्मेदारी अपने चिकित्सकों की टीम और कर्मचारियों पर छोड़ दी, तो खुद अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा को पूरा करने में लग गए। इसके लिए उन्होंने शहर के कई फाइनेंसर तलाशे और उनसे पैसा लेकर जमीन खरीदनी शुरू कर दी। उनका ध्यान अस्पताल से हटा तो वहां पर गड़बड़ी शुरू हो गई। कर्मचारियों ने चांदी काटी तो चिकित्सकों की टीम ने भी अपनी मनमानी शुरू कर दी। इसमें पूरा नुकसान हरिओम आनंद को हुआ। हालात ये हो गए कि हरिओम आनंद का अस्पताल में शेयर 50 प्रतिशत से घटकर करीब तीन प्रतिशत पर आ गया।