शहीद को सलामी देते हुए
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बच्चों को पढ़ाकर अफसर बनाने की तमन्ना रह गई अधूरी
शहीद सतेंद्र की पत्नी सोनिया ने रोते हुए बताया कि उनकी 11 जून को आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने 19 जून को घर आने की बात कही थी। सोनिया के मुताबिक वे जब भी घर आते थे या फोन पर बात करते थे तो वे बच्चों की पढ़ाई और भाइयों की नौकरी के लिए चिंतित रहते थे। वे कहते थे कि हमने अपने दिन कैसे भी गुजारे हो, लेकिन बच्चों को वे पढ़ा लिखाकर उच्च शिक्षा दिलाकर अधिकारी बनाने का काम करेंगे, लेकिन अब उनके जाने के बाद हमें कुछ नहीं सूझ रहा है। चारों तरफ अंधेरा नजर आ रहा है। किसे पता था कि वो फिर घर पर कभी वापस नहीं आएंगे।