पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद लगी आग में कई परिवारों की छोटी- छोटी खुशियां भी खाक हो गई। मुसीबत का पहाड़ उन पर टूट पड़ा है। मासूम बच्चों से मां की ममता छीन गई है तो, मजदूरी कर परिवार के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करने वाली भी नहीं रहीं। अब इन तीन परिवारों के बच्चों की परवरिश कैसे होगी, कैसे होगी परिवारों की गुजर बसर, यह चिंता गहरा गई है।