दंगा पीड़ित इंतजार
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मीडियाकर्मी पहुंचे, पड़ी हुई थीं लाशें
वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर जोशी बताते हैं, उस समय मैं रिपोर्टिंग करने के लिए मलियाना गया था। मेरे साथ एक अन्य पत्रकार और फोटोग्राफर भी थे। हमें अंदर जाने से रोका गया। फिर भी किसी तरह चले गए। हमने देखा कि तालाब के किनारे शव पड़े हुए थे। बिजली नहीं थी, लालटेन की रोशनी थी। स्थानीय लोगों ने हमें बताया था कि पीएसी और पुलिसवालों ने गोलियां चलाकर लोगों को मारा है।