केतन के घर के बाहर आर्मी अफसर
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सबको खुश करके केतन जम्मू गए तो रोजाना फोन पर सबसे बातचीत का सिलसिला चलता रहा। रोजाना पत्नी, बेटी, मां, पिता से बात करके सबका हालचाल लेते थे। मां के बीमार रहने के कारण पिता से अधिकतर यही बात होती कि उनका ध्यान रखना। लेकिन सोमवार को आई इस मनहूस खबर ने सब कुछ उजाड़कर रख दिया। पिता रविंद्र कुमार ये समझ ही नहीं पा रहे हैं कि करें तो आखिर करें क्या? कैसे उसकी मां को जाकर बताएं कि तेरा लाल देश के लिए शहीद हो गया है। बहू ईरा का कैसे सामना करें। सुबकते हुए बस वह यही बड़बड़ाते रहे कि सबसे कहता था कि ध्यान रखना लेकिन खुद अपना ध्यान नहीं रखा। अब मां के बारे में कौन पूछेगा। बहू और पोती से किए वादे कौन पूरे करेगा।