इतिहास के गवाक्ष से
मंदिर के प्रबंधक कृष्णपाल बताते हैं, बड़े-बूढ़े मंदिर की कहानी बताते थे। हरिद्वार में एक मौनी बाबा थे। भगवान ने उन्हें स्वप्न देकर कहा कि संभलहेड़ा में मेरी पूजा-अर्चना कराओ। तब मौनी बाबा खुद यह शिवलिंग लेकर आए और यहां उसकी स्थापना की। तुलसीराम के बेटे हुकूमत राय जो वैश्य परिवार से थे, ने मंदिर का निर्माण कराया। इस मंदिर को भी तोड़ने का प्रयास हुआ लेकिन सफल न हो सका। राजस्थान, एमपी, महाराष्ट्र हर जगह से लोग यहां आते हैं। मंदिर चंदा और दान से चलता है।