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Karva Chauth आज: सोलह शृंगार कर अपने चांद का दीदार करेंगी सुहागिनें, चंद्र दर्शन से पहले इस विधि से करें पूजन

Thu, 13 Oct 2022 01:23 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ चंद्रोदय समय - फोटो : अमर उजाला
पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला सबसे अहम करवा चौथ व्रत महिलाओं के लिए हमेशा से खास रहा है। सोलह शृंगार कर चांद के दर्शन और पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा को सुहागिनें शिद्दत से निभाने के लिए आतुर रहती हैं। इस बार यह व्रत विशेष होगा। कई साल बाद करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र और मंगल का अमृत योग बन रहा है। यह पिया संग प्रेम को बढ़ाएगा और दांपत्य जीवन में खुशहाली लाएगा।

रोहिणी नक्षत्र के साथ वृष उच्च राशि में चंद्रमा का योग होने के कारण करवाचौथ को अधिक मंगलकारी बना रहा है। इसे अमर सुहाग योग भी कहा जा सकता है। इस योग में भगवान गणेश, चौथ माता व चंद्रमा का पूजन अखंड सौभाग्य और समृद्धि देने वाला है। करवा चौथ को लेकर विवाहित महिलाओं में उमंग देखते ही बन रही है। पर्व की पूर्व संध्या पर बुधवार को बाजार में शृंगार, पूजन सामग्री और ब्यूटी पार्लरों में सजने संवरने, मेहंदी लगवाने के लिए दिन भर महिलाओं की भीड़ लगी रही।   
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सहारनपुर निवासी हिमांशी व कनिष्का - फोटो : अमर उजाला
सत्यभामा और मार्कंडेय योग भी बन रहा है जो अन्य योगों की तुलना में शुभकारी है। यह शुभ संयोग भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के मिलन के समय बना था। कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी कृत्तिका नक्षत्र में शुरू होकर रोहिणी नक्षत्र में संपन्न होगी। चंद्रोदय रात्रि में रात 08:10 बजे होगा। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि ऐसी  मान्यता है कि 27 नक्षत्र चंद्रमा की 27 पत्नियां हैं। इनमें से रोहिणी उन्हें विशेष प्रिय है। उन पर चंद्रदेव अपना सारा प्यार बरसाना चाहते हैं।

 
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पहली करवाचौथ - फोटो : अमर उजाला
मां पार्वती ने रखा था करवाचौथ व्रत
ठाकुरद्वारा मंदिर के पुजारी उमेशचंद कोत्स ने बताया कि हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार करवा चौथ का व्रत रखने की शुरुआत मां पार्वती के समय से है। उन्होंने भगवान शिव के लिए इस व्रत को रखा था। इसके बाद महाभारत के दौरान जब अर्जुन तपस्या करने के लिए इंद्रनील पर्वत पर गए हुए थे, तो उनकी पत्नी द्रोपदी को चिंता हुई। कृष्ण के कहने पर द्रोपदी ने भी इस व्रत को रखा था।

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करवाचौथ पर्व आज - फोटो : अमर उजाला
कुछ स्थानों पर एक दूसरी कहानी भी प्रचलित है। बहुत समय पहले वीरावती नाम की एक महिला थी। उसकी शादी सुदर्शन नाम के एक ब्राह्मण से हुई। वीरावती ने पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा।

सुदर्शन के भाइयों ने वीरावती का व्रत खंडित करने के लिए आग जलाई और उसे चंद्रमा बोलकर दिखाया। वीरावति ने भी उसे देखकर अपना व्रत खोल दिया। इसके चलते सुदर्शन बीमार रहने लगे। तो देवराज इंद्र की पत्नी वीरावती के पास पहुंची और उन्हें फिर से अखंड व्रत रखने को कहा। वीरावती ने दोबारा व्रत रखा तो उनके पति ठीक हो गए।
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करवाचौथ पर्व आज - फोटो : अमर उजाला
चंद्रोदय से पहले करें शिव-पार्वती की पूजा
चंद्रोदय से कुछ समय पहले शिव-पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। चांद निकलने के बाद महिलाएं पति को छलनी में दीपक रखकर देखती हैं और पति के हाथों जल पीकर उपवास खोलती हैं।
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करवाचौथ पर्व आज - फोटो : अमर उजाला
यह है पूजन का शुभ मुहुर्त
वैसे तो अपराह्न 03:00 बजे के बाद कभी भी करवा बदलकर पूजन किया जाना शुभ होगा। शुभ और अमृत की चौघड़िया शाम 04:25 बजे से 07:27 बजे तक का समय विशेष योग वाला होगा।
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करवाचौथ - फोटो : amar ujala
वृषभ लग्न में उदित होगा सुहाग का चांद
रात को चंद्रोदय का समय 08:10 बजे के बाद है। उस समय चंद्रोदय वृषभ लग्न में होगा।
राहुकाल -1:30 से 03:00 बजे दोपहर तक होगा।
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