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वायुसेना दिवस से पहले ही ध्वस्त हुआ 'गरूड़' , देखें विमान हादसे की 13 रोचक तस्वीरें

Sat, 06 Oct 2018 02:57 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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हादसे में क्षतिग्रस्त विमान - फोटो : अमर उजाला
समय सुबह करीब सवा नौ बजे। रंछाड़, जिवाना गुलियान और सिरसली गांव के किसान अपने खेतों में व्यस्त थे। एकाएक रंछाड़ गांव के ऊपर विमान डांवाडोल होते दिखा। विमान ने चक्कर लिया और जिवाना गुलियान गेट की तरफ मुड़ गया। किसान गड़बड़ी भांपकर खेतों से बाहर की ओर भागे लेकिन तब तक विमान का पैराशूट खुल चुका था। देखते ही देखते विमान जमीन की तरफ तेजी से आने लगा। कुछ ही ऊपर रहने पर पायलट खेतों में कूद गए और विमान धमाके के साथ खेत में धंस गया। हालांकि विमान में सवार सभी सदस्य सुरक्षित बच गए लेकिन ग्रामीणों के लिए यह हादसा एक अजूबा बन गया। देखें इस विमान हादसे के बाद की कुछ रोचक तस्वीरें:-
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हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
विमान अगर आबादी के ऊपर गिरता तो हादसा हो सकता था। हादसे का शिकार हुआ माइक्रोलाइट विमान तीन साल पहले एयरफोर्स का हिस्सा बना था और इसे गरुड़ नाम दिया गया था। स्लोवेनियाई कंपनी पिपिस्टेल एयरक्राफ्ट से वायुसेना, नेवी और एनसीसी कैडेटों के प्रशिक्षण के लिए किया जाता है। रंछाड़ के किसान ओमप्रकाश बताते हैं कि जिस समय हादसा हुआ वह खेतों में कार्य कर रहे थे। अगर विमान पेड़ से नहीं टकराता तो यह सुरक्षित खेत में उतर सकता था। ऐसा लग रहा था, जैसे पायलट ईंख के खेत की बराबर में खाली पड़े खेत की तरफ इस विमान को ले जाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन यह हादसा हो गया।
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एयरफोर्स ने शुरू की विमान क्रैश होने की जांच

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
किसान रवि तोमर का कहना है कि खेत में उन्हें धमाके की आवाज सुनाई दी। मौके पर पहुंचे तो विमान जमीन में धंसा हुआ था और पायलट उसके पास पहुंच गए थे। पांच मिनट बाद ही दूसरा टू सीटर  हेलिकॉप्टर वहां पहुंचा और एक पायलट को लेकर चला गया। धमाके की आवाज जिसने भी सुनी वह मौके की ओर दौड़ा। विमान अगर आबादी के ऊपर गिरता तो हादसा हो सकता था। जिस खेत में विमान गिरा, उसमें कोई भी किसान नहीं था।

आग की तरह फैली सूचना पहुंच गए छह गांव के लोग

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
विमान रंछाड़ गांव के जंगल में जिवाना गेट के नजदीक क्रैश हुआ। जैसे ही विमान गिरा, इसके कुछ ही देर में यह सूचना आग की तरह लोगों के बीच फैल गई। सोशल मीडिया पर सूचना वायरल हुई तो आसपास के करीब छह गांव के सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गए। खेतों में काम कर रही महिलाओं के अलावा बच्चे भी मौके पर पहुंचे और एयरक्रॉफ्ट को देखा। मोबाइल के जरिये लोगों ने वीडियो बनाई और खूब फोटो शेयर किए।

 
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युवाओं ने विमान हटवाने में की मदद

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
टू-सीटर माइक्रो एयरक्राफ्ट हादसे की एयरफोर्स ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। एयरफोर्स के अधिकारियों ने मौके पर करीब एक घंटे तक पड़ताल और पायलट्स से पूछताछ की। खेतों की फोटो और वीडियोग्राफी कराई गई। एसपी शैलेश पांडेय का कहना है कि एयरफोर्स से जुड़ा मामला है और उन्हीं की टीमें जांच कर रही हैं। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने बताया कि जांच में वायुसेना की तकनीकी टीमें और स्थानीय पुलिस प्रशासन सुरक्षा और टीम के सहयोग के लिए मौके पर गया था। मौके पर पहुंचा  दूसरा हेलिकॉप्टर भी लोगों के लिए अजूबा बन  गया। जितनी देर हेलिकॉप्टर खेत में रहा गांव वालों का जमकर फोटो सैशन चला।

 
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आठ को मनाया जाएगा वायुसेना दिवस 

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
आठ अक्तूबर को वायुसेना दिवस मनाया जाएगा। इन दिनों हिंडन एयरबेस पर इसके लिए फाइनल रिहर्सल भी चल रहा है। माना जा रहा है कि वायुसेना दिवस के लिए चल रही तैयारियों के मद्देनजर ही यह एयरक्रॉफ्ट उड़ाया गया था। विमान को क्षतिग्रस्त स्थल से मुख्य सड़क पर लाने में गांव के युवाओं सहित अन्य ग्रामीणों का बड़ा योगदान रहा।
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बच्चे से लेकर बड़े तक सेल्फी लेने में जुटे रहे, वीडियो भी बनाई

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
गांव में विमान क्रैश होने की सूचना पर पहुंचे सैकड़ों युवा क्षतिग्रस्त विमान के साथ सेल्फी खींचते नजर आए। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने उन्हें दौडाया। लेकिन युवा फिर विमान के इर्द-गिर्द पहुंच जाते। वहीं, सोशल मीडिया पर भी हादसे की फोटो और वीडियो अपलोड होती रही।

कई गांवों से विमान देखने पहुंचे ग्रामीण 

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
रंछाड गांव में विमान क्रैश होने की सूचना क्षेत्र मेें फैलते ही रंछाड गांव के अलावा रहतना, सिरसली, मांगरौली, पुसार, जिवाना, बिनौली, बामनौली, बिजरौल आदि सहित दर्जनो गांव के सैकड़ो लोग विमान को देखने के लिए पहुंचे। बच्चों ने कंधों पर बैठकर विमान को देखा। इतना ही नहीं, कई स्कूलों से बच्चे भी विमान देखने पहुंच गए।

पायलट बोले, सब ठीक है सब विमान से पीछे रहना

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
किसानों के मुताबिक जब वह मौके पर पहुंचे तो पायलट से जानकारी लेने का प्रयास किया गया। पायलटों ने कहा कि सब ठीक हैं। बस वे विमान से पीछे रहकर सेना की मदद करें। इस बीच पुलिस मौके पर पहुंच चुकी थी। 

पांच मिनट में पहुंच गया दूसरा विमान

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
टू-सीटर माइक्रो एयर क्राफ्ट के क्रैश होने के बाद एयरफोर्स ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। विमान हादसे के पांच मिनट बाद दूसरा छोटा विमान पहुंचा। इसमें एक पायलट को ले जाया गया। इसके करीब एक घंटे बाद एयरफोर्स के अधिकारी हेलीकॉप्टर के जरिए पहुंचे और मौके पर करीब एक घंटे तक पड़ताल की। पायलट से जानकारी ली गई। खेतों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई। एसपी शैलेश पांडेय का कहना है कि एयरफोर्स से जुड़ा मामला है। इसमें उन्हीं की टीम जांच कर रही है। 

 

पायलट ने दिखाई सूझबूझ

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
इंजन में तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट विमान को सुरक्षित उतारने का पूरा प्रयास किया। पहले विमान को आबादी से दूर खेतों की ओर ले गए, उसके बाद खेत में सुरक्षित लैंडिंग का प्रयास किया। विमान का पैराशूट पेड़ में फंस जाने के कारण विमान उतरते समय अनियंत्रित हो गया और उसका अगला हिस्सा सीधे जमीन से टकराया। ग्रामीण पायलट के साहस और सूझ-बूझ को सराह रहे हैं। 

 

घूंघट की आड़ मेें विमान देखने पहुंचीं महिलाएं

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
गांव मेें विमान क्रैश की सूचना आग की तरह फैल गयी। सूचना पर गांव की महिलाएं परिवार की युवतियों के साथ घूंघट की आड में खेतों के डोले से होते हुए काफी तादात में विमान को देखने पहुंची और चर्चा कर रही थी कि शुक्र है भगवान का किसी के साथ हादसा नहीं हुआ।

 
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पहले भी हुई है इमरजेंसी लैंडिंग

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रंछाड के जंगल मेें माइक्रो एयरक्राफ्ट के क्रैश होने की जिले में पहली घटना नहीं है। इससे सात दशक पूर्व ढ़िकौली गांव में एक बार विमान लड़ाई के दौरान कैश हुआ था और दूसरी बार तकनीकी खराबी के चलते विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। इसके अलावा रंछाड, रमाला और किशनपुर बिराल गांव के जंगल मेें भी 50-60 साल पहले विमान में तकनीकी खराबी के चलते इमरजेंसी लैंडिंग हो चुकी है। ढिकौली गांव मेें वर्ष 1964 में हरपाल के खेत में विमान क्रैश हो गया था। पायलटों ने पैराशूट से अपनी जान बचाई थी। इसके बाद वर्ष 1987 में भी विमान में तकनीकी खराबी आने के कारण विमान की इमरजेंसी लैंडिग कराई गई थी। 1964 में तो जंग के दौरान विमान क्रैश हो गया था। तब ग्रामीण डर गए थे कि कहीं गांव पर ही तो हमला नहीं हो गया है। इससे पहले रंछाड गांव में भी करीबन वर्ष 1955 में एक बार पहले भी एक विमान को जमीन पर उतारा गया था। 
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