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हर-हर भोले नम शिवाय: केसरिया हुआ शहर, कांवड़ यात्रा में दिखा ईश्वरीय, मातृ और देशभक्ति का अनूठा संगम

Thu, 01 Aug 2024 07:45 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला
कांवड़ यात्रा में तीन भक्तियों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। ईश्वरीय भक्ति, मातृ भक्ति और देश भक्ति से ओतप्रोत शिवभक्त मेरठ शहर में अपने शिवालयों के पास पहुंच गए हैं। मां के साथ बच्चे कांवड़ ला रहे हैं। कांवड़ियों में केसरिया ध्वज के साथ राष्ट्रीय ध्वज भी लहरा रहे हैं। रुड़की रोड, दिल्ली रोड, गढ़ रोड पूरी तरह केसरिया रंग में रंगा है। कोई शहीदों के लिए कांवड़ लाया है,  कही तिरंगा कांवड़ गुजर रही है तो कहीं शिवभक्तों की टोलियां देशभक्ति गीतों पर झूम रही हैं। 

 
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कांवड यात्रा 2024 - फोटो : अमर उजाला
पांव में छाले और धूप छांव के बीच कांवड़िया अपने शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं। पूरा शहर कांवड़ियों की सेवा में जुटा है। शाम ढलते ही पूरा शहर झांकियों से पट जाता है। इसके साथ ही कांवड़ सेवा शिविरों में डांस और डीजे प्रतियोगिता शुरू हो गई है। मेरठ के आसपास की विशाल झांकी कांवड़ हर किसी को आकर्षित कर रही हैं। कांवड़ सेवा शिविरों में शिव तांडव नृत्य करते दिखाई दिए। कांवड़ को लाइटों से सजाया गया है।
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माता पिता को लेकर जाते भिवानी के विकास - फोटो : अमर उजाला
खेड़ी गांव के कांवड़ियों का स्वागत
कंकरखेड़ा बाईपास पर गांव खेड़ी ग्रेटर नोएडा की मनमोहक झांकी सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रही। झांकी कांवड़ में गांव के 40 से 50 भोलों का स्वागत किया गया। वहीं भिवानी निवासी विकास अपने माता पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से जल लेकर आए हैं।

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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला
गाजियाबाद निवासी दूसरी कक्षा के छात्र कार्तिक ने बताया कि पिता हर वर्ष कांवड़ लेने जाते हैं। उनका कहना है कि परिवार की खुशहाली और बच्चों की उन्नति के लिए कांवड़ लाते हैं। ऐसे में इस बार मैं भी अपने पापा के साथ कांवड़ लाया हूं। 23 जुलाई को हरिद्वार से चले थे।आज गाजियाबाद पहुंच जाएंगे।

बड़ा होकर पुलिस अफसर बनूंगा
भूड़बराल निवासी वीर ने बताया कि कक्षा पांच में पढ़ता है। बड़ा होकर पुलिस अफसर बनने का सपना है। पहली बार बड़े भाई के साथ कांवड़ लाया हूं। कांवड़ लाने में कोई थकान महसूस नहीं हुई।
 
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विजय हिंदुस्तानी - फोटो : अमर उजाला
 शामली जनपद के विजय हिदुस्तानी शहीदों के लिए कांवड़ लेकर पहुंचे हैं। उन्होंने अपने शरीर को 51 तिरंगा पिन लगाए हैं और गले और पैरों में बेड़ियां डाली हुई हैं। साथ ही भगतसिंह की फोटो के साथ वह कांवड़ लेकर शामली पहुंचे हैं।
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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला
दादी के साथ बानी लाई कांवड़
नोएडा की कक्षा छह की छात्रा बानी ने बताया कि दादी और आंटी कांवड़ लेने जा रही थीं। मैं भी दादी के साथ कांवड़ लेने आ गई। मम्मी पापा की लंबी आयु के लिए कांवड़ लाई हूं। परिवार में सदा खुशियां रहे और पापा मम्मी सदा प्यार से रहें इसलिए कांवड़ उठाई।
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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला
बच्चा पार्क पर लगाया चिकित्सा शिविर
बच्चा पार्क स्थित कांवड़ शिविर पर मेरठ के दवा व्यापारियों द्वारा कांवड़ियों के लिए निशुल्क चिकित्सा कैंप लगाया। निशुल्क दवा मनोज अग्रवाल, सुधीर कुमार, अंकुर सहारण, सुशील कुमार, शिवम अग्रवाल ने वितरित की। जय बाबा महाकाल सेवा समिति द्वारा चतुर्थ कांवड़ सेवा शिविर लगाया गया।  
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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला
बीमार मां को ठीक करने के लिए मांगी थी मन्नत
सोनीपत निवासी अजय ने बताया कि मेरी मां मौसमी कई साल से बीमार थी और वह दवाइयों से भी ठीक नहीं हो पा रही थी। हरिद्वार जाकर भगवान शिव से मां को ठीक करने के लिए मन्नत मांगी और शिवालय पर आकर जलाभिषेक किया था। एक माह बाद ही मेरी मां ठीक हो गई। इसके बाद से लगातार कांवड़ ला रहा हूं। भगवान शिव पर पूरा विश्वास है। वहीं बाघू निवासी रवि ने बताया कि भगवान शिव से घर बनाने की मन्नत मांगी है और घर का सपना पूरा होने के बाद भी कांवड़ लाएगा। भगवान शिव में पूरी आस्था है और भगवान कभी भी अपने भक्तों को निराश नहीं करते।
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