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Ganga Snan 2022: हस्तिनापुर में गंगा मेले का हुआ भव्य उद्घाटन, सीसीटीवी कैमरे से होगी निगरानी

Sat, 05 Nov 2022 04:28 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ/हस्तिनापुर
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गंगा मेले के उद्घाटन में पहुंचे सांसद राजेंद्र अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
हस्तिनापुर में मखदूमपुर गंगा घाट पर लगने वाले गंगा स्नान मेले का शनिवार को भव्य उद्घाटन किया गया। इस दौरान सांसद राजेंद्र अग्रवाल, डीएम दीपक मीणा व एसएसपी रोहित सिंह सजवाण भी मौके पर मौजूद रहे। मेले में असामाजिक तत्वों पर तीसरी आंख से भी नजर रखी जाएगी। तंबुओं की नगरी को बसाने का सिलसिला शुरू हो गया है। जिला पंचायत द्वारा आयोजित कराए जा रहे गंगा स्नान मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। मेला  आठ नवंबर तक चलेगा। मखदुमपुर मेले की तैयारियों को देखने के लिए एसडीएम अखिलेश यादव ने भी मेला स्थल का निरीक्षण किया।



मेले में पहुंचने वाले महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के स्नान करने के लिए गंगा के किनारे पर अलग-अलग घाट बनाए जा रहे हैं। जिन्हें बनाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जहां पर जल्द ही घाट बनकर तैयार होंगे जिसमें महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम की अलग से व्यवस्था की जा रही है। गंगा स्नान मेले में दीपदान और पिंडदान के लिए दूरदराज से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। जो अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान पिंडदान करते हैं इसके साथ ही मुंडन संस्कार आदि की क्रियाएं भी गंगा किनारे पर की जाती हैं।
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गंगा मेले के उद्घाटन में पहुंचे एसएसपी मेरठ - फोटो : अमर उजाला
गंगा में पानी कम होने से बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की परेशानी
जिस स्थान पर मेला आयोजित हो रहा है वहां पर गंगा की दो बड़ी धाराएं हैं। पहली धारा में पानी बहुत कम है तो दूसरी धारा में पानी बहुत ज्यादा है इसलिए दूसरी धारा पर जाने से रोकने के लिए गंगा के टापू पर पीएससी के टेंट लगाए जा रहे हैं जहां से श्रद्धालुओं को जाने से रोका जाएगा। वहीं श्रद्धालुओं को कम पानी में स्नान करना पड़ेगा। इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी ने बताया कि इस बार  गंगा मेला काफी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रहेगा। मेले स्थल पर पूर्ण रूप से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
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गंगा मेले के उद्घाटन में पहुंचे सांसद राजेंद्र अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
इस बार गंगा की अलग-अलग तीन धाराएं प्रवाहित हो रही हैं। पहली धारा पर मेला आयोजित किया जा रहा है। बीते तीन दिनों में जलस्तर कम हो गया है। और पानी कम हुआ तो श्रद्धालुओं को स्नान करने में दिक्कत आ सकती है। श्रद्धालु को गहरे पानी में जाना पड़ेगा।

ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस बल और पीएसी की मांग की गई है। मेला प्रशासन ने घाट पर दस फीट ऊंचा वॉच टावर बनाया है। मेला परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इंस्पेक्टर ओमप्रकाश चौधरी को मेला प्रभारी बनाया गया है।

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गंगा मेले के उद्घाटन में पहुंचे एसएसपी मेरठ - फोटो : अमर उजाला
फ्लड कंपनी और गोताखोर भी रहेंगे
मेला स्थल पर पेयजल व्यवस्था विद्युत व्यवस्था और सड़कों को दुरुस्त करने का काम करीब पूर्ण हो चुका है। मुख्य द्वार भी बना दिया गया है। गंगा की रेती में तंबुओं की नगरी बसा दी गई है।

दो बड़ी हाइलोजन लाइट गंगा की ओर लगाई गई हैं। जिससे गहरे पानी में जाने वाले श्रद्धालुओं पर नजर रखी जा सके। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पीएसी की फ्लड कंपनी और स्थानीय गोताखोरों की टीमें तैयार की जा रही हैं।
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गंगा मेले के उद्घाटन में पहुंचे एसएसपी मेरठ - फोटो : अमर उजाला
खेती छोड़ गंगा स्नान को जा रहे किसान
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए किसानों का कारवां मखदूमपुर के लिए बढ़ने लगा है। बुधवार को भैसा-बुग्गियों और बैलगाड़ियों की लाइन लगी रही। किसानों ने अपने भैंसों और बैलों की जोड़ी को सजा रखा था।

क्षेत्र के गांव छुर, छबड़िया, ईकड़ी, पाथौली, भलसोना, दबथुवा आदि गांव के लोग अपने भैंसा बुग्गी से गंगा स्नान मेले के लिए बढ़ते नजर आए। किसानों द्वारा अपने भैंसों और बैलों के ऊपर डाली गई झूल और स्पेशल बुग्गी आकर्षण का केंद्र रही। पेराई सत्र शुरू होने के बाद भी किसान गन्ना छिलाई रोकर गंगा मईया के दर्शन को निकल रहे हैं।
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गंगा घाट - फोटो : amar ujala
हस्तिनापुर में प्रदूषित जल में स्नान करेंगे श्रद्धालु
कर्ण घाट स्थित पौराणिक बूढ़ी गंगा पर भी मेले का आयोजन होता है। यहां पर श्रद्धालुओं के स्नान करने के लिए नगर पंचायत ने पर्याप्त व्यवस्था नहीं कराई है। श्रद्धालुओं को यहां महीनों से भरे बारिश के गंदे पानी में ही स्नान करना होगा। नगर पंचायत ने बूढ़ी गंगा पर आयोजित होने वाले मेले के ठेके की नीलामी करीब चार लाख 82 हजार रुपये में की थी।

इसके बाद भी मेला स्थल पर पेयजल की व्यवस्था तक नहीं है। कर्ण घाट पर सफाई कार्य नहीं कराया गया है। प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ के आचार्य मुकेश शांडिल्य के अनुसार, कौरवों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने इसी स्थान पर दीपदान किया था। उसके बाद से यहां पर दीपदान की परंपरा चली आ रही है।
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