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डॉक्टर सुसाइड केस: आखिर क्या है मौत का राज, पत्नी ने पूछताछ में बताई ये बड़ी बात, जल्द सामने आएगा असली सच

Mon, 07 Mar 2022 05:37 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ/ शामली
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ENT Doctor suicide - फोटो : अमर उजाला
वीकेंड पर छुट्टियां मनाने अपने देहरादून स्थित आवास पर जा रहे शामली के चिकित्सक ने एक रेस्टोरेंट के बाहर पत्नी से कुछ बातचीत करने के बाद कार से उतर लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मार ली। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना के बाद फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे एसपी देहात और सीओ ने जांच पड़ताल की। आत्महत्या की वजह पता नहीं चल सकी है। पुलिस ने शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।  

मूल रूप से मेरठ के धंजू गांव निवासी और शामली के प्रतिष्ठित ईएनटी सर्जन डॉ. आरपी सिंह (राकेश पाल) खुदकुशी से पहले बेहद तनाव में थे। उनकी पत्नी डॉ.अलका ने बताया कि बेचैनी और तनाव बढ़ने पर उन्होंने शामली-सहारनपुर हाईवे पर कार रोकी थी। पत्नी कार में बैठी रहीं और डॉ. सिंह ने टहलते हुए कुछ दूर जाकर लाइसेंसी पिस्टल से खुदकुशी कर ली। 
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ENT Doctor suicide - फोटो : अमर उजाला
सीसीटीवी फुटेज के अनुसार शनिवार की रात सहारनपुर हाईवे पर टोल प्लाजा से पहले स्थित डिलाइट एंब्रोसिया रेस्टोरेंट के बाहर करीब पौने नौ बजे बेलेनो कार रुकती है। डॉ. आरपी सिंह और उनकी पत्नी डॉ. अलका कार से बाहर आते हैं। डॉ. सिंह कार के पास ही टहलने लगते हैं जबकि डॉ.अलका वॉशरूम चलीं गईं। करीब आठ बजकर 53 मिनट पर दोनों कार में बैठ जाते हैं। 

कार चलती नहीं और दंपती कभी गाड़ी में बैठते तो कभी गाड़ी से उतर कर बातें करने लगते हैं। काफी देर तक ऐसा ही होता रहा। रेस्टोरेंट के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में डॉ. आरपी सिंह बेचैनी में कार के पास इधर-उधर टहलते दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद करीब नौ बजकर 20 मिनट पर वह अचानक कार से दूर सड़क की तरफ कैमरों की जद से बाहर हो चले गए। माना जा रहा है कि उसी वक्त उन्होंने खुदकुशी कर ली।

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ENT Doctor suicide - फोटो : अमर उजाला
एसओ सतेंद्र नागर ने बताया कि डॉ. अलका ने बताया कि उनके पति डॉ. आरपी सिंह बेहद तनाव में थे और बेचैनी की वजह से कार चलाने में असमर्थता जता रहे थे। पत्नी का कहना था कि शायद किसी मरीज को लेकर शायद कोई बात हो। आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो रही है। पिस्टल पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए सहारनपुर भेज दिया। 

रोते बिखलते रहे परिजन... ऐसा कदम क्यों उठाया
डॉ. आरपी सिंह की मौत की सूचना से परिजनों पर मानो पहाड़ टूट गया। रात में ही डॉ. सिंह के भाई और अन्य परिजन रोते बिलखते पहले घटनास्थल पर पहुंचे इसके बाद वे शव का पोस्टमार्टम कराने सहारनपुर मोर्चरी गए। मृतक के भाई और परिवार के अन्य लोग काफी देर तक बिलखते रहे। रिश्तेदारों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें ढांढस बंधाया। सभी की जुबां पर एक ही सवाल था कि आखिर डॉ.आरपी सिंह ने ऐसा कदम क्यों उठाया। 

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ENT Doctor suicide - फोटो : अमर उजाला
मिलनसार और खुशमिजाज थे डॉ. आरपी सिंह 
शामली के प्रतिष्ठित ईएनटी सर्जन डॉ. आरपी सिंह की मौत होने की सूचना मिलते ही शहर के चिकित्सक और उनके परिचित सन्न रह गए।  बड़ी संख्या में लोग उनके नर्सिंग होम पर पहुंच गए। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अकबर खान और डॉ. वेदभानु मलिक ने बताया कि डॉ. सिंह मिलनसार और खुशमिजाज थे।  डॉ. सिंह शामली में करीब 25 साल से रह रहे थे। उनकी पत्नी डॉ. अलका सिंह स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। अक्सर रविवार की छुट्टी से पहले शनिवार देर शाम को देहरादून चले जाते थे और सोमवार को शामली लौटते थे। 
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ENT Doctor suicide - फोटो : अमर उजाला
तलाश रहे आत्महत्या की वजह
चिकित्सक द्वारा अपने लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मार आत्महत्या की गई है। अभी आत्महत्या करने की वजह का पता नहीं चल सका है। अभी कोई तथ्य प्रकाश में नहीं आया है। पुलिस जांच कर रही है। परिजनों की तरफ से कोई तहरीर भी नहीं मिली है। - अजेंद्र यादव,  सीओ सदर 
 
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निजी डॉक्टर का फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
 शव देखते ही धंजू में चीख- पुकार, भाई ने दी मुखाग्नि
 डॉ. आरपी सिंह का अंतिम संस्कार रविवार को उनके पैतृक गांव धंजू में किया गया। डॉ. सिंह का शव दोपहर के समय धंजू में लाया गया तो चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। छोटे भाई ने डक्टर आरपी सिंह को मुखाग्नि दी। रविवार को जैसे ही डॉ. राकेश का शव गांव में लाया गया तो घर में चीखपुकार मच गई। अंतिम यात्रा में पूरा गांव शामिल हुआ। छोटे भाई डा. योगेश पाल ने मुखाग्नि दी। पूरे गांव में शोक का माहौल है। सब डॉ. आरपी सिंह के सौम्य व्यवहार और उनकी खुशमिजाजी का जिक्र कर रहे थे।  

बेटे का शव देख बेहोश हो गईं मां
डाॅ. राकेश पाल का शव देख मां बेहोश हो गईं। होश में आने पर भी वह बार-बार बस  यही  बोल रही थीं, मेरे लाल कहां चला गया तू, मुझे  मेरे बेटे का चेहरा दिखा दो, मेरे गला लगा दो, मेरे लाल कहां चला गया। वहीं पेड़ के नीचे चारपाई पर बैठे 87 साल के बुजुर्ग पिता कालीचरण की आंखों से अनवरत आंसू बहते रहे। जो भी यहां पहुंचा उसकी आंखें नम हो गईं।  
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