निजी डॉक्टर का फाइल फोटो।
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शव देखते ही धंजू में चीख- पुकार, भाई ने दी मुखाग्नि
डॉ. आरपी सिंह का अंतिम संस्कार रविवार को उनके पैतृक गांव धंजू में किया गया। डॉ. सिंह का शव दोपहर के समय धंजू में लाया गया तो चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। छोटे भाई ने डक्टर आरपी सिंह को मुखाग्नि दी। रविवार को जैसे ही डॉ. राकेश का शव गांव में लाया गया तो घर में चीखपुकार मच गई। अंतिम यात्रा में पूरा गांव शामिल हुआ। छोटे भाई डा. योगेश पाल ने मुखाग्नि दी। पूरे गांव में शोक का माहौल है। सब डॉ. आरपी सिंह के सौम्य व्यवहार और उनकी खुशमिजाजी का जिक्र कर रहे थे।
बेटे का शव देख बेहोश हो गईं मां
डाॅ. राकेश पाल का शव देख मां बेहोश हो गईं। होश में आने पर भी वह बार-बार बस यही बोल रही थीं, मेरे लाल कहां चला गया तू, मुझे मेरे बेटे का चेहरा दिखा दो, मेरे गला लगा दो, मेरे लाल कहां चला गया। वहीं पेड़ के नीचे चारपाई पर बैठे 87 साल के बुजुर्ग पिता कालीचरण की आंखों से अनवरत आंसू बहते रहे। जो भी यहां पहुंचा उसकी आंखें नम हो गईं।