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UP Election Result: पश्चिमी यूपी की छह सीटों पर रहा जबरदस्त मुकाबला, सरधना में अतुल प्रधान ने संगीत सोम को किया चित

Thu, 10 Mar 2022 06:19 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेरठ की हॉट सीट सरधना विधानसभा सीट से सपा-रालोद गठबंधन के अतुल प्रधान ने भाजपा के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम को हरा दिया है।
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up-election-result-2022 - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा के चुनाव के लिए मतगणना जारी है। वर्ष 2017 में प्रचंड लहर में जहां मेरठ जिले की छह सीटें जहां भाजपा की झोली में जा गिरी थीं, वहीं इस बार पार्टी कांटे के मुकाबले में फंसी रही। कैंट सीट पर सबकी निगाहें हार-जीत के अंतर पर लगी थीं। सरधना में संगीत सोम की हैट्रिक कड़े मुकाबले में फंसी, तो हस्तिनापुर में प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश खटीक की साख दांव पर लगी थी। किठौर में पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर कड़े मुकाबले में फंसे रहे। किसान आंदोलन के सबसे ज्यादा असर वाली सिवालखास सीट को भाजपा इस बार नहीं बचा सकी। कैंट को छोड़ जिले की बाकी छह सीटों पर हार-जीत का अंतर बेहद करीबी रहा। काउंटिंग के अंतिम राउंड तक बाजी पलटती रही। हालांकि आज शाम तक पूरे नतीजे सबके सामने होंगे।

सरधना विधानसभा सीट : संगीत सोम की नहीं लगी हैट्रिक, अतुल ने जीता जनता का दिल  
सरधना में बड़ा सवाल यह था कि भाजपा और विधायक संगीत सोम हैट्रिक लगाएंगे या फिर सपा के अतुल प्रधान बाजी मारेंगे। लगातार दो बार से संगीत सोम जीत रहे थे। सरधना विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाता सबसे ज्यादा हैं। साथ ही ठाकुर चौबीसी का भी बड़ा प्रभाव है। इसके अलावा जाटव, गुर्जर, सैनी और जाट मतदाता भी हराने और जिताने का दम रखते हैं। साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद सरधना काफी सुर्खियों में रहा था।

सरधना विधानसभा सीट से सपा रालोद गठबंधन के अतुल प्रधान ने भाजपा के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम को हरा दिया है। संगीत सोम इससे पहले दो बार यहां से चुनाव जीते थे, जबकि अतुल प्रधान दो बार चुनाव हारे थे। सरधना सीट पर ऐसा पहली बार हुआ है जब सपा का कोई प्रत्याशी जीता है। हार जीत का अंतर करीब 18000 वोटों का है। हालांकि, अभी आधिकारिक घोषणा होनी बाकी है। जब चार राउंड की मतगणना होनी बाकी थी, उससे पहले ही संगीत सोम मोदीपुरम में कृषि विश्वविद्यालय स्थित मतगणना स्थल से चले गए थे।
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UP Election result 2022 - फोटो : अमर उजाला
मतगणना स्थल पर ही चलते रहे प्रत्याशियों में शब्द बाण
सरधना सीट पर गिनती पर ही चल रहे दोनों प्रत्याशियों में सरधना की हॉट सीट पर गठबंधन और भाजपा प्रत्याशी में कांटे की टक्कर चलती रही। सरधना सीट पर शुरुआती रुझानों में भाजपा विधायक संगीत सोम 12000 से आगे तक पहुंच गए थे लेकिन आठवें राउंड की मतगणना तक अतुल प्रधान 1489 वोटों से आगे हो गए। दोपहर होने तक सरधना हॉट सीट पर 20 राउंड आते आते स्थिति बदल गई है। जिसके बाद भाजपा विधायक खेमे में हलचल पैदा हो गई है। समर्थक मायूस हो गए। भाजपा विधायक का जो गढ़ था वोटों का वह लगभग टूट गया।  यहां अतुल प्रधान लोगों का दिल जीतने में कामयाब हुए। अतुल प्रधान 18160 वोटों से जीते हैं। उन्हें 118047 वोट मिली है, जबकि संगीत सोम को 99887 वोट मिले हैं।

संगीत सोम का घमंड टूटा: अतुल प्रधान
जीत के बाद बोले अतुल प्रधान संगीत सोम का घमंड टूटा, हिंदू मुस्लिम की राजनीति करते थे। लोगों ने सबक सिखाया दलितों का शोषण किया, इसलिए इनकी हार हुई है। हम जनता के बीच रहे इसलिए हम जीते हैं।
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शाहिद मंजूर - फोटो : अमर उजाला
किठौर : शाहिद मंजूर ने मारी बाजी
किठौर में सपा के कद्दावर नेता शाहिद मंजूर और भाजपा प्रत्याशी और मौजूदा विधायक सत्यवीर त्यागी का कड़ा मुकाबला जारी है। बसपा से केपी मावी और कांग्रेस से बबीता गुर्जर ने भी चुनाव लड़ा है। शाहिद मंजूर किठौर से लगातार तीन बार विधायक रहे हैं। 2017 में शाहिद को भाजपा के सत्यवीर त्यागी ने 20822 मतों से हराकर विधानसभा में दस्तक दी थी। सत्यवीर दोबारा जीतने में कामयाब नहीं हो सके और 
मतगणना के अंतिम राउंड में 2388 मतों से शाहिद मंजूर बाजी मार ले गए।

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gulam mohamaad - फोटो : amar ujala
सिवालखास : गुलाम मोहम्मद के हाथ लगी बाजी
सिवालखास सीट पर सबकी नजर लगी थी। एक समय रालोद का गढ़ रही यह सीट 2017 में भाजपा के खाते में गई थी। इस बार यहां से भाजपा ने जिला सहकारी बैंक चेयरमैन मनिंदरपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया था। रालोद ने यहां 2012 में सपा के टिकट पर विधायक रहे हाजी गुलाम मोहम्मद को उतारा। गुलाम मोहम्मद 2017 में वे भाजपा के जितेंद्र सतवाई से 11,421 वोटों से हारकर दूसरे नंबर पर रहे थे। 

सिवालखास, 8वें राउंड में भाजपा 1168 वोट से आगे चल रही थी। गुलाम मोहम्मद को 27577 और मनिंदर पाल को 28745 वोट मिले। 11वे राउंड में रालोद ने बढ़त ले ली, भाजपा से 7868 वोट की बढ़त बनी थी। सिवालखास में 18वे राउंड तक रालोद को 61469, भाजपा को 61024 वोट मिले। 26वें राउंड तक रालोद 95313 पर रही, भाजपा 83313 पर पहुंची यहां  गठबंधन प्रत्याशी ने 12060 की लीड ली।

मेरठ की चर्चित सिवालखास विधानसभा सीट से गुलाम मोहम्मद की करीब 7 से 8 हजार से जीत गए हैं। आधिकारिक घोषणा बाकी है।
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UP election result 2022: रफीक अंसारी - फोटो : अमर उजाला
शहर विधानसभा सीट : खूब दौड़ी रफीक अंसारी की साइकिल  
शहर सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रफीक अंसारी लगातार दूसरी बार जीतेंगे या फिर भाजपा के कमल दत्त शर्मा, इस पर सबकी निगाह लगी थी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में लक्ष्मीकांत वाजपेयी को रफीक अंसारी ने 28 हजार 769 वोटों से हराया था। इस बार कांग्रेस से रंजन शर्मा ने भी अच्छा चुनाव लड़ा लेकिन वह बेहतर नहीं कर पाए। मुस्लिम मतों का बंटवारा कम होने से रफीक अंसारी जीते के प्रति आश्वस्त थे, वहीं कमलदत्त सर्वसमाज के वोट मिलने से अपनी जीत को पक्की मानकर चल रहे थे। लेकिन नतीजे चौंकाने वाले आए। 

मेरठ शहर विधानसभा सीट पर रफीक अंसारी की जीत हो गई। आधिकारिक घोषणा का इंतजार बाकी है। शहर सीट से भाजपा प्रत्याशी कमल दत्त शर्मा को लगभग 85000 वोट मिले। वहीं बीजेपी प्रत्याशी कमल दत्त शर्मा लोहिया नगर मंडी मतगणना स्थल से कार्यकर्ताओं के साथ बाहर निकल गए। 
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दिनेश खटीक - फोटो : amar ujala
हस्तिनापुर : नहीं टूटा मिथक, कायम रहेगा इतिहास
हस्तिनापुर विधानसभा सीट को लेकर मिथक है कि यहां जो पार्टी जीतती है लखनऊ में सरकार उसी की बनती है। ऐसे में आज मतगणना के बाद ये मिथक बरकरार रहता है। भाजपा के प्रत्याशी दिनेश खटीक और गठबंधन प्रत्याशी योगेश वर्मा के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली। ऐसे में देखना है कि दिनेश खटीक दोबारा विधायक बनकर इतिहास बना गए वहीं योगेश वर्मा चुनाव नहीं जीत पाए। हस्तिनापुर में एक इतिहास ये भी है कि सन 1977 के बाद से लगातार कोई विधायक यहां दोबारा चुनाव नहीं जीत पाया है। वर्ष 2017 में दिनेश खटीक ने योगेश वर्मा को 36062 वोटों से शिकस्त दी थी। इस बार भी दोनों के बीच कड़ी टक्कर थी। लेकिन कामयाबी दिनेश खटीक के हाथ लगी। 

 
 
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नाहिद हसन की बहन इकरा हसन जीत के बाद - फोटो : अमर उजाला
कैराना  विधानसभा सीट : मृगांका पर खूब बरसे वोट पर नहीं मिली जीत, नहिद हसन जीते
उत्तर प्रदेश के शामली जिले की कैराना सीट पर भी इस बार सबकी निगाहें टिकी थीं। कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाकर भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने इस सीट को खास बना दिया था। भाजपा ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को इस सीट से टिकट देकर इस मुद्दे को और हवा देने का काम किया। खास बात यह थी कि हुकुम सिंह इस सीट से सात बार विधायक बने। कैराना में इस बार भी पिछले चुनाव की तरह सपा से नाहिद हसन और भाजपा से मृगांका सिंह मैदान में थे। 

कैराना विधानसभा सीट पर भाजपा की मृगांका सिंह गठबंधन के उम्मीदवार नाहिद हसन से शुरूआती रुझाम में आगे चल रही थी। 14 राउंड तक मृगांका आगे रहीं, जबकि दोपहर बाद गठबंधन प्रत्याशी नाहिद हसन ने बढ़त ले ली। अंतिम दौर तक वह आगे रहे। नाहिद हसन करीब 25 हजार वोटों से जीते। 
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