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महाभारत के इतिहास से उठेगा पर्दा: दूसरे दिन उत्खनन के दौरान टेराकोटा रिंगवेल और शंख की बनीं चूड़ियां मिलीं, इस काल के होने की संभावना

Wed, 23 Feb 2022 06:28 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क अमर उजाला, मेरठ
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उत्खनन के दौरान मिले अवशेष - फोटो : amar ujala
मेरठ से सटे हस्तिनापुर में प्राचीन पांडव टीला पर चल रहे उत्खनन कार्य में मंगलवार को टेराकोटा रिंगवेल, पक्की ईट, शंख की बनीं चूड़ियां समेत कई अवशेष मिले। यह अवशेष गुप्तकाल के बताए जा रहे हैं। हालांकि इन्हें जांच के लिए भेजा गया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ये अवशेष किस काल हैं।

मेरठ मंडल सर्किल के पुरातत्व अधिकारियों के नेतृत्व में कई विशेषज्ञ उत्खनन कार्य में लगे हैं। मंगलवार को टीले की ऊपरी सतह से करीब चार मीटर नीचे खोदाई में गुप्तकाल का टेराकोटा रिंगवेल (अनाज भरने का बड़ा गोल पात्र) प्राप्त हुआ है। इसी कालखंड की एक प्राचीन दीवार, शंख की चूड़ियां, चित्रित मृदभांड, प्राचीन मिट्टी के बर्तन, जानवरों की हड्डी और दांत आदि प्राप्त हुए हैं। रिंग वेल और दीवारों को निखारने का काम विशेषज्ञों की टीम कर रही है। इनकी लंबाई चौड़ाई के बाद में अभी पता नहीं लगा है। सभी अवशेषों को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। 

 
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उत्खनन। - फोटो : amar ujala
पिछले कई दिनों से उत्खनन के दौरान कई अवशेष प्राप्त हो रहे थे। अब मिल रहे अवशेष गुप्तकाल के बताए जा रहे हैं। खोदाई के दौरान कालखंड का पता लगाने के लिए मिट्टी की भी जांच कराई जा रही है। 
 
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उत्खनन देखते लोग। - फोटो : amar ujala
बारिश बन सकती है बाधा 
मंगलवार शाम अचानक मौसम ने करवट बदली। तेज हवाओं के साथ आसमान में काले बादल छाए रहे। उत्खनन के दौरान मिले अवशेष भी मौसम में नमी रही और आसमान में बादल छाए रहे। ऐसे में उत्खनन कार्य प्रभावित हो सकता है।
 

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हस्तिनापुर। - फोटो : amar ujala
तीसरी से छठी शताब्दी तक रहा गुप्त काल
नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के चेयरमैन प्रियंक भारती ने बताया कि गुप्त काल तीसरी से छठी शताब्दी तक रहा। यह युग टेराकोटा के प्रयोग के लिए स्वर्णिम युग रहा है। इसी काल में हिंदुओं में पूजे जाने वाली मूर्तियों का भी आविष्कार हुआ था। गंगा के क्षेत्र में जितने भी उत्खनन हुए हैं उनमें विष्णु, कार्तिकेय, सूर्य, गंगा, यमुना की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। इस काल से संबंधित बरेली क्षेत्र के आंवला तहसील के अहि क्षेत्र, बिहार के राजगीर, हस्तिनापुर में पूर्व में हुए उत्खनन में भी टेराकोटा फिगराइन, मूर्तियां प्राप्त की जा चुकी हैं। इस काल में रेडवेयर पोटरी का प्रचलन था। यह प्रचलन कुषाण काल तक रहा। चौथी शताब्दी के मध्य से छठी शताब्दी तक मेरठ के आसपास का क्षेत्र गुप्तकाल के शासकों के अधीन रहा।
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हस्तिनापुर में उत्खनन। - फोटो : amar ujala
मेरठ में मौजूद हैं गुप्तकाल के मंदिर
मेरठ व आसपास के क्षेत्रों में गुप्त काल के कई मंदिर आज भी मौजूद हैं। मेरठ में बुढ़ाना गेट के समीप सहगासा नामक स्थान पर मौजूद शीतला माता मंदिर में गुप्तकालीन मूर्ति है। जिनमें मगरमच्छ पर सवार गंगा व कछुए पर सवार यमुना की मूर्तियां हैं। संभावना जताई जा रही है कि उत्खनन के दौरान मिले अवशेष गुप्तकाल के हो सकते हैं।
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