मेरठ में 15 अगस्त पर वीरता पदक पाने वाले इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा भ्रष्टाचार में फंस गए है। यही नहीं इंस्पेक्टर ने थाने पर भ्रष्टाचार मुक्त के पोस्टर खुद चस्पा कराए थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर पोस्ट भी वायरल की थी कि हमारा थाना अब भ्रष्टाचार से मुक्त है। इस पोस्ट को लेकर पुलिस कर्मियों में अलग-अलग चर्चाएं थी। अब पोल खुली तो सभी अधिकारी हैरान रह गए।
एसएसपी द्वारा हुई कार्रवाई
मेरठ में एसएसपी को जैसे जानकारी मिली कि इंस्पेक्टर रिश्वत ले रहे हैं, उन्होंने गोपनीय जांच शुरू करा दी। फिर एसएसपी को सूचना मिली कि कबाड़ी वकार से भी एक लाख रुपये की डील हो गई। वहीं 50 हजार रुपये लेकर वकार को छोड़ दिया गया। बाकी रकम वकार बाद में देगा। इसके बाद एसएसपी ने एसपी सिटी के नेतृत्व में टीम बना दी। हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह की घेराबंदी कर ली। वकार मुजफ्फरनगर से मेरठ पहुंचेगा। इसका पता एसएसपी की टीम को पहले से था। वकार के साथ सादी वर्दी में चार पुलिस वाले भी लग गए। सिपाही को वकार ने रजबन में बुलाया। रुपये लेते ही पुलिस टीम ने सिपाही को दबोच लिया। सिपाही को पकड़ने के बाद पुलिस उसको पुलिस लाइन ले गई। जहां चार घंटे एसएसपी, एसपी सिटी, एएसपी ने पूछताछ की। सिपाही ने इंस्पेक्टर की सारी पोल खोल दी। पुलिस ने वकार से भी पूछताछ की। इसके बाद दोनों को आमने-सामने बैठा दिया। जिस पर सिपाही ने वसूली की रकम के बारे में पुलिस अधिकारियों को बताया।