फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: वीरता पदक पाने वाले इंस्पेक्टर के खुले बड़े राज, थाने में फैला था रिश्वतखोरी का जाल, वायरल करता था ईमानदारी के पर्चे

Wed, 01 Sep 2021 07:01 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

15 अगस्त के अवसर पर वीरता पदक पाने वाले इंस्पेक्टर के राज खुले तो अधिकारी भी हैरान रह गए। इंस्पेक्टर सोशल मीडिया पर ईमानदारी के पोस्टर वायरल करता था। इस रिपोर्ट में जानिए पूरा थाना कैसे रिश्वतखोरी के जाल में फंसा था।
विज्ञापन
1 of 5
इंस्पेक्टर सदर बाजार बिजेंद्र सिंह राणा - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में 15 अगस्त पर वीरता पदक पाने वाले इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह राणा भ्रष्टाचार में फंस गए है। यही नहीं इंस्पेक्टर ने थाने पर भ्रष्टाचार मुक्त के पोस्टर खुद चस्पा कराए थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर पोस्ट भी वायरल की थी कि हमारा थाना अब भ्रष्टाचार से मुक्त है। इस पोस्ट को लेकर पुलिस कर्मियों में अलग-अलग चर्चाएं थी। अब पोल खुली तो सभी अधिकारी हैरान रह गए।

एसएसपी द्वारा हुई कार्रवाई
मेरठ में एसएसपी को जैसे जानकारी मिली कि इंस्पेक्टर रिश्वत ले रहे हैं, उन्होंने गोपनीय जांच शुरू करा दी। फिर एसएसपी को सूचना मिली कि कबाड़ी वकार से भी एक लाख रुपये की डील हो गई। वहीं 50 हजार रुपये लेकर वकार को छोड़ दिया गया। बाकी रकम वकार बाद में देगा। इसके बाद एसएसपी ने एसपी सिटी के नेतृत्व में टीम बना दी। हेड कांस्टेबल मनमोहन सिंह की घेराबंदी कर ली। वकार मुजफ्फरनगर से मेरठ पहुंचेगा। इसका पता एसएसपी की टीम को पहले से था। वकार के साथ सादी वर्दी में चार पुलिस वाले भी लग गए। सिपाही को वकार ने रजबन में बुलाया। रुपये लेते ही पुलिस टीम ने सिपाही को दबोच लिया। सिपाही को पकड़ने के बाद पुलिस उसको पुलिस लाइन ले गई। जहां चार घंटे एसएसपी, एसपी सिटी, एएसपी ने पूछताछ की। सिपाही ने इंस्पेक्टर की सारी पोल खोल दी। पुलिस ने वकार से भी पूछताछ की। इसके बाद दोनों को आमने-सामने बैठा दिया। जिस पर सिपाही ने वसूली की रकम के बारे में पुलिस अधिकारियों को बताया।
विज्ञापन

2 of 5
आरोपी सिपाही। - फोटो : amar ujala
तीन बार मिली इंस्पेक्टर की शिकायत 
एसएसपी ने भ्रष्टाचार को लेकर पहली क्राइम मीटिंग में सभी थानेदारों को चेतावनी दी थी। सोतीगंज में लगातार वाहन चोरों और कबाड़ियों के खिलाफ अभियान चलाया, फिर भी वहां पर लगातार चोरी के वाहन मिल रहे थे। इस दौरान भी सदर थाने की तीन शिकायत एसएसपी तक पहुंची। तीन बार कबाड़ी भी एसएसपी आवास पर पहुंचे। इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे थे। 

भ्रष्टाचार मुक्त थाने के चस्पा किए थे पोस्टर 
इंस्पेक्टर सदर बिंजेंद्र सिंह राणा ने थाने पर भ्रष्टाचार मुक्त के पोस्टर खुद चस्पा कराए थे। सोशल मीडिया पर पोस्ट भी वायरल की थी कि हमारा थाना अब भ्रष्टाचार से मुक्त है। इस पोस्ट को लेकर पुलिस में अलग अलग चर्चाएं थी।
विज्ञापन

3 of 5
मेरठ: एसएसपी प्रभाकर चौधरी। - फोटो : amar ujala
बीमे के खेल की जांच करते-करते खुद दलदल में फंसा
ट्रक चोरी का फर्जी मुकदमा कैसे दर्ज हो गया? पुलिस की क्या भूमिका रही? इसकी बारीकी से जांच करने के निर्देश एसएसपी ने चार दिन पहले इंस्पेक्टर सदर बाजार बिजेंद्र सिंह राणा को दिए थे।  मामले का राजफाश इंस्पेक्टर ने कर दिया, लेकिन वह खुद भ्रष्टाचार में फंस गया। ट्रक चोरी के मामले में आरोपियों से ही इंस्पेक्टर ने रुपये वसूलना शुरू कर दिया। ट्रक बरामद कराने के लिए एसएसपी ने इंस्पेक्टर से कहा कि ट्रक मालिक और ड्राइवर को छोड़ दो, वही ट्रक लाकर देंगे। इसके बाद इंस्पेक्टर की नीयत बदल गई। इंस्पेक्टर ने ट्रक मालिक और ड्राइवर से मोटी रकम वसूलने के बाद कबाड़ी को नहीं छोड़ा। कबाड़ी वकार को ट्रक मालिक इमरान ने ट्रक बेचने की बात कही थी, जो कि झूठ पाई गई। इंस्पेक्टर ने वकार को धमकाया और फिर सिपाही को उसके पीछे लगा दिया। सिपाही ने वकार से कहा कि रुपये बगैर तो यहां से नहीं छूटेगा। सिपाही ने एक लाख रुपये में वकार से बात कर ली। 

4 of 5
आरोपी सिपाही। - फोटो : amar ujala
15 अगस्त को मिला था गैलेंट्री अवार्ड 
इंस्पेक्टर सदर को 15 अगस्त पर गैलेंट्री अवार्ड मिला था। कंकरखेड़ा थाने में पोस्टिंग के दौरान दिल्ली के शातिर अपराधी शक्ति नायडू एनकाउंटर में ढेर हुआ था। जिसको लेकर तत्कालीन एसएसपी और इंस्पेक्टर को गैलेंट्री अवार्ड मिला था। 

भ्रष्टाचार के मामले में बदनाम सदर थाना 
सोतीगंज में 80 कबाड़ी हैं, जोकि चोरी और लूट के वाहन काटते हैं। सदर थाना हमेशा ही भ्रष्टाचार के मामले में बदनाम रहता है। इस थाने में पोस्टिंग को लेकर इंस्पेक्टर और दरोगाओं में बोली तक लगती है। सपा और बसपा सरकार में सत्ताधारी नेताओं के करीबी इंस्पेक्टर को ही यहां का चार्ज मिलता था। योगी सरकार में भी इस थाने में भ्रष्टाचार का बोलबाला कम नहीं हुआ। पुलिस केवल दिखावे के लिए सोतीगंज के कबाड़ियों पर कार्रवाई करती है। यही वजह है कि चोरी और लूट के वाहन यहां कटना बंद नहीं होते।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
एसएसपी प्रभाकर चौधरी। - फोटो : amar ujala
स्मैक माफिया से पुलिस लेती थी रुपये
स्मैक माफिया तस्लीम ने जेल जाने से पहले सदर बाजार और रेलवे रोड थाना पुलिस की पोल खोली है। जिसका वीडियो खुद पुलिस वालों ने बनाया। तस्लीम ने बताया था कि वह बीट कांस्टेबल से लेकर पुलिस अधिकारियों तक लाखों रुपये हर महीने देता है। भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज होने के बाद अब एसएसपी ने इस मामले की भी गंभीरता से जांच कराने की बात कहीं है। 

जिले में भ्रष्टाचार का दूसरा मुकदमा 
एसएसपी ने पुलिस पर भ्रष्टाचार का यह दूसरा मुकदमा दर्ज कराया है। 15 पुलिसवाले सस्पेंड किए गए। 100 से ज्यादा पुलिस वाले लाइन में भेजे। एक महीने पहले गंगानगर थाने में दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया गया था। अभी उस मामले में दरोगा फरार चल रहा है। अब सदर इंस्पेक्टर को भी पुलिस ने लिखापढ़ी में वांछित बताया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें