सिमरन की चीख और गोली की आवाज सुनकर परिवार के लोग हड़बड़ाकर नींद से जागे। चारपाई पर बेटी को लहूलुहान हालत में तड़पते देखकर परिवार के लोग बोले कि आरिश तूने यह क्या कर दिया। आरिश के हाथ में तमंचा था और वह हंसता रहा। बोला सिमरन को समझाया था, वो नहीं मान रही थी।
आरिश अपनी बड़ी बहन सिमरन को मारने की प्लानिंग कई दिन पहले कर चुका था। सिमरन मोहल्ले के एक युवक से फोन पर बात करती थी, इसे लेकर आरिश का कई बार बहन से झगड़ा भी हुआ। परिवार के लोगों को भी इसकी जानकारी होना बताया गया। पांच दिन पहले सिमरन की मां सन्नो मायके में आई थी। दोनों बहन-भाई को सन्नो समझा रही थी। मगर बुधवार रात आरिश सोया नहीं। परिवार के लोग जब गहरी नींद में थे, तभी वह अपनी चारपाई से उठा। कमरे से तमंचा लाया और सिमरन को गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर सन्नो और परिवार के लोग दौड़कर वहां पहुंचे। आरिश चारपाई के पास खड़ा था और सिमरन तड़प रही थी। शोर सुनकर आसपास के लोग भी पहुंच गए। परिवार के लोग सिमरन को उठाकर सीएचसी ले गए। लेकिन आरिश वहां से नहीं हिला। उसने कहा कि बहुत बदनामी कर रखी थी, कब तक बर्दाश्त करता, उसे तो मरना ही था।