जांच करती पुलिस
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सुपरवाइजर ने अन्य कर्मचारियों पर निगाह बढ़ा दी थी। चोरी और अन्य काम बंद करा दिए थे। महराज जहां अपने साले के नौकरी से निकलने पर परेशान था, वहीं उसका चोरी का काम भी बंद हो गया था। इंस्पेक्टर परतापुर ने बताया कि इसके बाद महराज ने अपने साले के साथ मिलकर 15 दिन पहले प्लानिंग बनाई कि अंकित को ठिकाने लगाना है। लेकिन वे डरते थे कि दबंग किस्म का होने के चलते अंकित को काबू करना आसान नहीं है। पुलिस का कहना है कि तीन जून को अंकित को अचानक दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद कांशी निवासी महराज ने अपने ही गांव के झोलाछाप डॉक्टर इरफान को बुलाया। पहले से ही प्लानिंग थी कि नशीला इंजेक्शन लगाना है। तीन जून की शाम जब अंधेरा हो गया तो इरफान ने अंकित की गर्दन के पास नशीला इंजेक्शन लगा दिया। उसके बाद बेहोश होने पर चाकू से गला काट दिया। शव को बोरे में बंद कर महिंद्रा पिकअप गाड़ी से ले जाकर गंगनहर में फेंक दिया।