Meerut News: ब्रह्मपुरी में मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ की हत्या कर दी थी। कोर्ट ने 125 तारीखों के बाद दोनों को हत्या का दोषी माना। कुल 22 गवाहों ने कोर्ट में गवाही दी। 14 अक्तूबर को अदालत सजा सुनाएगी।
सौरभ हत्याकांड: सौरभ की हत्या की आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को जिला जज ने सख्त टिप्पणी करते हुए बुधवार शाम दोषी करार दिया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा कि दोनों दोषियों ने न केवल सौरभ की हत्या की, बल्कि उसके शव के टुकड़े कर छिपा दिए। ऐसे अपराध समाज को झकझोरते हैं और सामाजिक के ताने-बाने को तोड़कर डर पैदा करते हैं। मुस्कान और साहिल की जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई।
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कोर्ट से बाहर आता सौरभ का भाई और मां।
- फोटो : अमर उजाला
इंदिरानगर निवासी सौरभ लंदन में नौकरी करता था। सौरभ के लंदन जाने के दौरान उसकी पत्नी मुस्कान के पुराने दोस्त साहिल शुक्ला से करीबी संबंध हो गए थे। 24 फरवरी 2025 को सौरभ अपनी बेटी और मुस्कान का जन्मदिन मनाने के लिए वापस आया था।
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सौरभ का फाइल फोटो व मुस्कान और साहिल
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ के वापस लौटने पर मुस्कान व साहिल ने संबंधों में बाधा बनने पर 3 मार्च 2025 की रात उसकी हत्या कर दी थी। मुस्कान ने सौरभ के खाने में नशीली दवा मिला दी। जब सौरभ बेसुध होकर सो गया, तब मुस्कान ने फोन कर साहिल को घर बुला लिया। दोनों ने मिलकर उस्तरे और चाकू से लेटे हुए सौरभ पर ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी।
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कचहरी में सौरभ की बुआ और मौसी।
- फोटो : अमर उजाला
नीले ड्रम में भर दिया था शव
सौरभ की हत्या करने के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए मुस्कान और साहिल ने जो तरीका अपनाया था उसकी चर्चा देश भर में रही थी। दोनों ने सौरभ के सिर को धड़ से अलग कर दिया और दोनों हाथ कलाइयों से काट दिए थे। इसके बाद वे बाजार से अनाज रखने वाला बड़ा नीला प्लास्टिक ड्रम, सीमेंट, बालू और डस्ट खरीदकर लाए थे।
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जानकारी देते अधिवक्ता।
- फोटो : अमर उजाला
शव के कटे हुए टुकड़ों को पॉलिथीन में लपेटकर नीले ड्रम में रख दिए थे। दुर्गंध रोकने के लिए ऊपर से सीमेंट और डस्ट का भारी घोल डालकर ड्रम को सील कर दिया था। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों पुलिस और परिजनों को गुमराह करने के लिए शिमला-मनाली घूमने चले गए थे। 19 मार्च को पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था।
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सुनवाई के दौरान कचहरी में रही वकीलों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
गवाहों और साक्ष्यों की अटूट कड़ी से साबित हुआ दोष
इस केस की गंभीरता को देखते हुए प्रतिदिन सुनवाई के आदेश थे। लगभग 125 तारीखों पर केस में सुनवाई हुई। 22 गवाहों ने अदालत में बयान दर्ज कराए। जिला जज ने दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनी। अदालत ने बचाव पक्ष के चश्मदीद न होने और संपत्ति विवाद में फंसाए जाने के तर्कों को दरकिनार करते हुए गवाहों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी माना।
मामले में पुलिस की विवेचना और चिकित्सकीय साक्ष्य अभियोजन पक्ष के लिए निर्णायक साबित हुए। जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि इस मामले में अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। 14 अक्तूबर को अदालत सजा सुनाएगी।