शालू गिरी (फाइल फोटो)
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बिधूना कोतवाली में तैनात शालू गिरि मार्च महीने में अपने गांव दत्तनगर आई थी। यहीं पर वह लॉकडाउन में फंस गई। फैजाबाद में तैनात शिक्षक राहुल गिरि भी लॉकडाउन के कारण घर आया हुआ था। दोनों परिवारों का पहले से ही आना जाना था। राहुल और शालू के बीच नजदीकियां बढ़ीं। लॉकडाउन में बिधूना नहीं लौट पा रही थी, जिस कारण उसे विभाग की ओर से बालैनी में ही ड्यूटी दे दी गई। शालू ने नौ किमी दूर गांव से रोजाना आवागमन के बजाय बालैनी में थाने के पास ही कमरा किराए पर ले लिया था। कुछ दिन बाद ही राहुल और शालू ने अपने परिजनों से शादी की इच्छा जताई, जिसके बाद दोनों का बालैनी में लिए गए कमरे में ही 26 अप्रैल को विवाह कर दिया गया था। नवदंपती इसी कमरे में रहा। तीन मई को शालू को बालैनी थाने से रिलीव कर दिया गया और पांच मई को उसने वापस बिधूना कोतवाली में ड्यूटी ज्वॉइन कर ली थी। शादी के बाद से वह लगातार परेशान चल रही थी। परेशानी की वजह क्या थी। मायके पक्ष का कहना है कि शालू ने किसी तरह का जिक्र नहीं किया।