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राम मंदिर चंदा चोरी: 'नौकरी छोड़ संघ से जुड़े, आपातकाल में 18 माह जेल में रहे'; UP के इस जिले के हैं चंपत राय

Sun, 28 Jun 2026 11:06 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर

सार

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में संघ परिवार और केंद्र सरकार की सख्ती के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा को श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा देना पड़ा। चंपत राय यूपी के बिजनौर जिले के मूल निवासी हैं। आइए जानते हैं उनके बारे हैं।
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Ayodhya Ram Mandir - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की बात सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय बंसल बिजनौर जिले के नगीना के रहने वाले हैं। उन्होंने प्रवक्ता पद छोड़ दिया था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए। वह आपातकाल में जेल भी गए।

18 नवंबर 1946 को जनपद बिजनौर के नगीना में मोहल्ला सरायमीर के रामेश्वर प्रसाद और सावित्री देवी के घर जन्मे चंपत राय करीब साढ़े चार दशक पहले श्रीराम मंदिर आंदोलन में हिस्सा लेने व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गए थे और नगीना में परिवार को छोड़ दिया था। वह दस भाई-बहनों में दूसरे नंबर के हैं।

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नगीना के सरायमीर में चंपत राय का पैतृक निवास - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चंपत राय के भाई संजय बंसल बताते हैं कि उनकी प्राथमिक शिक्षा कस्बे के प्राथमिक पाठशाला से हुई। हिंदू इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। वर्ष 1967 में मेरठ कॉलेज, मेरठ से बीएससी और 1969 में एमएससी वर्धमान कॉलेज बिजनौर से करने के बाद 1970-71 में रोहतक के एक डिग्री कॉलेज में पढ़ाया।
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चंपत राय - फोटो : amar ujala
उसके उपरांत 1972 में आरएसएम कॉलेज धामपुर (बिजनौर) में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता बन गए। वर्ष 1980-81 में उन्होंने प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जोड़ लिया।
 

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चंपत राय। - फोटो : अमर उजाला
आपातकाल में 18 महीने तक जेल में रहे
25 जून, 1975 को जब देश में आपातकाल लगा तो चंपत राय आरएसएम कॉलेज धामपुर में प्रवक्ता थे। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने कॉलेज पहुंची तो प्राचार्य के कक्ष में उन्हें बुलवाया गया। उस समय वे कक्षा में विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। प्राचार्य कक्ष में पुलिस से उन्होंने कहा कि घर से वे कपड़े लेकर पुलिस कोतवाली पहुंच रहे हैं। घर आने पर माता-पिता कोतवाली तक साथ गए। करीब 18 महीने तक जेल में रहे।

 
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सुनील बंसल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भाई सुनील बंसल ने कहा- मामले की निष्पक्ष जांच की जाए
मोहल्ला सराय मीर में बर्तन की छोटी सी दुकान चलाने वाले चंपत राय के भाई सुनील बंसल चंपत राय पर लगे आरोपों को राजनैतिक दुर्भावना से ग्रसित बताते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने राम मंदिर आंदोलन व देशसेवा के लिए घर, परिवार व नौकरी का त्याग किया। उनका कहना है कि उनके इस्तीफे की खबर से उन्हें बहुत पीड़ा हुई है। 

 
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मनोज अरोड़ा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने घर, परिवार व अपने लिए कभी कुछ नहीं किया है। चंपत राय के नगीना स्थित पैतृक निवास के सामने किराने की दुकान करने वाले मनोज अरोड़ा उन पर लग रहे आरोपों को निराधार बताते हैं। मनोज का कहना है कि चंपत राय बेहद ईमानदार व धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। 
 
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शलभ गोयल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चंपत राय के पैतृक आवास के सामने रहने वाले ट्रांसपोर्टर शलभ गोयल कहते हैं कि मिथ्या आरोप लगाने वाले लोगों को सजा भगवान श्रीराम देंगे। उनका कहना है कि जो कोई भी उनकी ईमानदारी को जांचना चाहता है, वह उनके नगीना के मोहल्ला सराय मीर में स्थित पैतृक आवास की स्थिति को देखकर आकलन कर सकता है। 

 

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नगीना के सरायमीर में चंपत राय का पैतृक निवास - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बजरंग दल के युवा नेता राहुल सैनी का कहना है कि चंपत राय ने अपना पूरा जीवन श्रीराम आंदोलन व देशसेवा में लगाया है। उन्हें जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। चंपत राय के गुरु रहे अवध बिहारी लाल अग्रवाल ने भी चंपत राय पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। विहिप नेता प्रदीप गर्ग का कहना है कि चंपत राय की निष्ठा व ईमानदारी पर सवाल उठाने वाले उनके व्यक्तित्व से पूरी तरह अंजान हैं। 

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चंपत राय। - फोटो : amar ujala
सरकार, संघ के चौतरफा दबाव और पीएमओ के फरनाम के बाद दिया इस्तीफा
लंबे समय तक मान मनौव्वल के असफल रहने के बाद संघ परिवार व केंद्र सरकार की सख्ती ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा। केंद्र सरकार अब नुकसान की भरपाई के लिए ट्रस्ट का पुनर्गठन करेगी। प्रधानमंत्री  सोमवार को स्वदेश लौटने के बाद पूरे मामले में मंथन करेंगे। माना जा रहा है कि ट्रस्ट में चंपत राय की जगह विहिप के महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ले सकते हैं।
 

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चंपत राय और अनिल मिश्रा - फोटो : PTI
चंपत और अनिल के पद छोड़ने का किया गया इंतजार
विहिप सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे में अनियमितता की सूचना आने के बाद से ही चंपत और अनिल के स्वेच्छा से पद छोड़ने का इंतजार किया जा रहा था। ऐसा नहीं होने पर इन्हें दोनों ही ओर से पद छोड़ने का सीधा संदेश दिया गया।

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चंपत राय - फोटो : ANI
हरिद्वार में बीते सप्ताह हुई विहिप की मार्गदर्शक मंडल की बैठक में भी आमराय थी कि प्रतिष्ठा और संभावित नुकसान के मद्देनजर इन्हें पद छोड़ देना चाहिए। इसके बाद चंपत को बैठक में संतों और पदाधिकारियों की इच्छा से भी अवगत कराया गया। सूत्रों ने कहा कि संघ गड़बड़ी सामने आने के तत्काल बाद ही चंपत राय के इस्तीफे के पक्ष में था। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, सवाल लोगों की आस्था को पहुंची चोट का है।

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चंपत राय - फोटो : संवाद
सख्त संदेश दिया, तो माने
चंपत राय शुक्रवार रात तक पद नहीं छोड़ने पर अड़े थे। इसके बाद शनिवार को उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय और संघ की ओर से तत्काल पद छोड़ने का सख्त संदेश दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें यहां तक कहा गया कि पद नहीं छोड़ने की स्थिति में ट्रस्ट की ओर से उन्हें हटाने की सूचना सार्वजनिक की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि चंपत अब इसी महीने के अंत तक आने वाली एसआईटी की रिपोर्ट के बाद मीडिया के समक्ष पक्ष रखेंगे।
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चंपत राय व डॉ. अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा। - फोटो : amar ujala
ट्रस्ट को विश्वसनीय बनाने के उठाए जाएंगे कदम
सूत्रों ने बताया, ट्रस्ट की बैठक अगले महीने दूसरे सप्ताह में हो सकती है। बैठक से पहले चढ़ावा चोरी मामले में हुए नुकसान की भरपाई का रोडमैप तैयार किया जाएगा। चढ़ावे को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ट्रस्ट को विश्वसनीय बनाने से जुड़े कदम उठाए जाएंगे।
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