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मुजफ्फरनगर: गुड़ के लिए तरस रही एशिया की सबसे बड़ी मंडी, केवल 10 प्रतिशत हो रही आवक

Thu, 06 Dec 2018 09:48 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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यूपी के मुजफ्फरनगर स्थित एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी गुड़ के लिए तरस रही है, कुल उत्पादन का दस प्रतिशत गुड़ भी मंडी में नहीं आ रहा है। गुड़ माफिया कोल्हुओं से सीधे गुड़ खरीद रहे हैं। जो सीधे दूसरे प्रदेशों को भेजा जा रहा है। सरकार के टैक्स की सीधे चोरी हो रही है। 90 प्रतिशत गुड़ पर माफिया का कब्जा है। ऐसे में मंडी समिति के अफसरों और जिला प्रशासन के अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 
 
 
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जिले में लगभग तीन हजार कोल्हू गुड़ बनाते हैं। गुड़ उत्पादन में यह देश का अग्रणी जिला है। यह देखते हुए ही प्रदेश सरकार ने भी एक जिला-एक उत्पाद में भी यहां के गुड़ को ही शामिल किया है। सरकार और प्रशासन को जहां गुड़ के व्यापार को संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए थी, वहीं इसके विपरीत एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी गुड़ के लिए तरस गई है।

 
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जिले में लगभग 80 हजार गुड़ के कट्टों का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। जबकि गुड़ मंडी में केवल सात से आठ हजार कट्टे ही प्रतिदिन आ रहे हैं। 90 प्रतिशत गुड़ माफिया कोल्हुओं से सीधे खरीद रहे हैं। मंडी शुल्क के रूप में सरकार को जाने वाला ढाई प्रतिशत भी माफिया को देना नहीं पड़ता। सरकार को सीधे करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है। 

 

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मंडी परिषद के अफसरों की मिली भगत से गुड़ को सीधे दूसरे प्रांतों को भेज दिया जाता है। जिन राज्यों में अवैध रूप से गुड़ भेजा जा रहा उनमें राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश मुख्य रूप से शामिल हैं। गुड़ टैक्स फ्री होने के कारण इन राज्यों में पकड़ा नहीं जाता है। मंडी के व्यापारी सीएम योगी आदित्यनाथ, विभाग की मंत्री स्वाति सिंह, विभाग के अधिकारियों से मिलकर और पत्र भेजकर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन गुड़ का अवैध कारोबार नहीं रुका है। मंडी समिति के सचिव तो जिले में 399 कोल्हू की ही बात करते हैं, जबकि यहां 498 गांव हैं, प्रत्येक गांव में दो से लेकर दस तक कोल्हू हैं।  
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मुख्यमंत्री को कर चुके हैं शिकायत 
दी गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय मित्तल कहते हैं कि गुड़ का अवैध व्यापार रोकने के लिए लेकर वह सीधे मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत कर चुके हैं। मुख्यमंत्री, अफसरों को आदेश भी दे चुके हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार से भी मिल चुके हैं और बता चुके हैं कि प्रति माह करोड़ों का टैक्स चोरी हो रहा है। डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट को तो लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।    
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अफसरों की आय का जरिया बने माफिया
दी गुड़ खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन के मंत्री श्याम सिंह सैनी का कहना है कि जिले में 90 गुड़ माफिया सक्रिय हैं। इनमें से 50 बड़े माफिया हैं, इन सबकी सूची जिला प्रशासन को दी जा चुकी है, अफसरों ने प्रत्येक से रकम तय कर रखी है। व्यापारियों के भारी विरोध के चलते बीते साल केवल एक गुड़ माफिया जेल भेजा गया। अफसरों को अपनी निजी कमाई की चिंता है, सरकार के टैक्स की नहीं। जिले में लगभग तीन हजार कोल्हू हैं, दस प्रतिशत का गुड़ भी मंडी में नहीं आ रहा।  
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हमें 399 कोल्हू की जानकारी : सिंह 
कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव आरके सिंह का दावा है कि जिले में मात्र 399 कोल्हू हैं, इन सबका गुड़ मंडी में ही आ रहा है। हमारी नजर में कहीं भी गुड़ का अवैध कारोबार नहीं हो रहा है। यदि कहीं अवैध कारोबार पकड़ा जाएगा तो कार्रवाई होगी।

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