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अमर उजाला की स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए प्रियंका गांधी की किसान महापंचायत के मायने

Thu, 11 Feb 2021 12:34 PM IST
कपिल kapil प्रदीप मिश्र, अमर उजाला, मेरठ
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priyanka gandhi - फोटो : amar ujala
सहारनपुर से प्रदेश के दूसरे छोर सोनभद्र तक को साधने की कोशिश में जुटीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने 2022 के लिए अपना अघोषित चुनाव अभियान बुधवार को शुरू कर दिया।

पश्चिमी यूपी में कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के बीच प्रियंका की सहारनपुर जिले में किसान पंचायत का मकसद क्षेत्र में पहले से सक्रिय रालोद और भाकियू के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन माना जा रहा है।
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कांग्रेस नेताओं के साथ प्रियंका गांधी - फोटो : amar ujala
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संवेदनशील मुद्दे हमेशा से चुनावी रणनीति के केंद्र में रहे हैं। यहां से बना माहौल पूरे प्रदेश के राजनीतिक परिदृष्य को प्रभावित करता है। इसलिए प्रियंका ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर शाकंभरी मंदिर में पूजा-अर्चना कर राजनीतिक अभियान का श्रीगणेश किया।
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प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में विधानसभा क्षेत्रों की शुरुआत सहारनपुर से ही होती है। फिलहाल, जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में से दो पर पार्टी के विधायक भी हैं। पार्टी यहां से किसानों के लिए संघर्ष करते हुए दिखने का संदेश देना चाहती है। इसीलिए प्रियंका ने केंद्र में सरकार बनने पर तीनों  कृषि कानून वापस लेने का बयान दिया है।

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किसान महापंचायत में बोलती प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला
इस क्षेत्र में अभी तक भाजपा, बसपा और रालोद-सपा गठबंधन के बारे में ही ज्यादा चर्चा हो रही है। कांग्रेस इसके बीच ही अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है। उसका मानना है कि सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील इस इलाके में उसे और विस्तार मिल सकता है, बशर्ते लोग यकीन कर पाएं कि कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए भी उनके बुनियादी मुद्दों की वकालत करेगी। प्रियंका चुनाव से पहले अपनी पार्टी की सोच और मुद्दों के बारे में साफ कर देना चाहती हैं। अब यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा वही होंगी।

यह भी पढ़ें: खरबपति मित्रों के लिए धड़कता है प्रधानमंत्री का दिल, किसानों का कर रहे अपमान : प्रियंका गांधी
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मंच से बोलती प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला
संबोधन
प्रियंका ने कृषि कानूनों की वामपंथी विवेचना कर किसानों को समझाया है कि इनके लागू होने पर किसान तबाह हो जाएंगे।
अमीरों और गरीबों के बीच असमानता बताने के लिए ही पीएम मोदी के 56 इंच के सीने के भाषण की याद दिलाई गई है।

समीकरण
भाजपा से नाराज किसानों को अपने साथ जोड़ने में फिलहाल रालोद ने कुछ हद तक सफलता हासिल की है।
बसपा इस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगी, क्योंकि उसके कै़डर वोट में अभी ज्यादा फूट नहीं पड़ी है।
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प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला
संभावना
पश्चिमी उप्र में कांग्रेस दलित वोटों के लिए आजाद समाज पार्टी के साथ अघोषित चुनावी गठबंधन कर सकती है।
कांग्रेस उन जातियों और समूहों को अपने साथ जोड़ना चाहती है, जो भाजपा और अन्य दलों के साथ नहीं हैं।

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