कभी न खत्म होने वाली आस्था और उसके साथ वैसा ही महसूस कराती कभी न खत्म होने वाली भीड़। हर कोई यही जानना चाह रहा है कि महाकुंभ के लिए कब जाना सही होगा? कहां से जाना सही होगा? कहां पर रुकना सही होगा? इतना ही नहीं त्रिवेणी में स्नान करने के बाद लोग अयोध्या और काशी की ओर जा रहे हैं, जिससे इन दो शहरों पर भी भीड़ का काफी दवाब नजर आ रहा है। आप भी अगर महाकुंभ में स्नान के बाद काशी या अयोध्या जाना चाह रहे हैं तो अभी थोड़ा रुकना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
महाकुंभ में उमड़े श्रद्धा के सैलाब का दबाव अब काशी और अयोध्या की गलियां भी महसूस कर रही हैं। अयोध्या की बात की जाए तो मंगलवार को भी श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा है। मंगलवार होने के चलते हनुमानगढ़ी में दो किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई है।
कुछ इसी तरह का दृश्य राम जन्मभूमि मंदिर की ओर जाने वाली गलियों का भी है। सोमवार को रामलला के दरबार में 3.55 लाख भक्तों ने हाजिरी लगाई। दो दिनों के भीतर रामलला के दरबार में छह लाख से अधिक भक्त पहुंच चुके हैं।
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अयोध्या पहुंचे श्रद्धालु
- फोटो : amar ujala
29 जनवरी को मौनी अमावस्या का मुख्य महापर्व है। अमावस्या आज देर शाम से ही लग रही है पर उदया तिथि में यह स्नान 29 को भोर से पूरे दिन चलेगा। इसके लिए भक्तों का रेला है। इस बीच मंगलवार सुबह से ही 10 लाख से ज्यादा भक्त सरयू स्नान कर नागेश्वरनाथ महादेव का अभिषेक करने के बाद हनुमानगढ़ी दर्शन के लिए पहुंचे रहे हैं।
प्रयागराज से अयोध्या पहुंचने के लिए आपको 180 किलो मीटर का सफर तय करना पड़ेगा। भीड़ बहुत अधिक होने के कारण आप कब स्टेशन पहुंचगे और कब अयोध्या, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
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महाकुंभ की भीड़ से काशी खचाखच
- फोटो : अमर उजाला
काशी का तो ऐसा हाल भगवान विश्वनाथ को भी नहीं मिल रहा सोने का वक्त
महाकुंभ की भीड़ से काशी हाउसफुल हो गया है। बाबा के दर्शन के लिए घंटों लोग लाइन में खड़े होकर इंतजार कर रहे। वहीं सोमवार को एक दिन में 11 लाख भक्त बाबा के धाम में पहुंचे। सामान्य दिनों में पहली बार रात एक बजे तक विश्वनाथ मंदिर को खोला गया। इससे पहले महाशिवरात्रि और सावन के महीने में देर रात तक मंदिर खुलता था। भीड़ को देखते हुए लगातार 22 घंटे तक दर्शन के लिए मंदिर को खुला रखा गया। रात 2:15 बजे मंदिर फिर से खुला। 22 घंटे लगातार भक्तों ने दर्शन-पूजन किया। भोर में 2:45 बजे मंगला आरती शुरू हुई। मंगला आरती के बाद दर्शन पूजन का सिलसिला फिर शुरू हो गया। मंगलवार को भी देर रात तक दर्शन कराए जाएंगे। इससे पहले सोमवार को दोपहर में दशाश्वमेध घाट से गोदौलिया रूट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। ऐसा पहली बार हुआ।
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मौनी अमावस्या के एक दिन पहले काली मार्ग पर श्रद्धालुओं का रेला।
- फोटो : अमर उजाला।
पुलिस बल और रेलवे पर भारी दबाव
प्रयागराज में 1-2 नहीं बल्कि पूरे 8 प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। इस सूची में प्रयागराज जंक्शन के अलावा फाफामऊ, प्रयागराज संगम, झूंसी, प्रयागराज छिंवकी, नैनी, प्रयागराज रामबाग और सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन का नाम शामिल है। इसके बाद भी स्टेशन पर जो भीड़ का दबाव इतना अधिक है कि आपको बहुत सावधानी रखने के आवश्यकता होगी।
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महाकुंभ में सोमवार को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला।
स्टेशन पर पहली बार ऐसी व्यवस्था भी की गई है कि अगर वाराणसी और अयोध्या जाने वालों की टिकट संख्या बहुत अधिक हो गई है तो, तुरंत एक नई गाड़ी इन दो शहरों के लिए भेज दी जा रही है और इसकी जानकारी स्टेशन पर घोषणा के माध्यम से दी जा रही है। दिलचस्प बात तो यह है कि पहली बार ऐसी घोषणाएं भी सुनाई दे रही हैं कि यह ट्रेन कहीं नहीं जा रही है, कृपया इसमें न बैठें।