विकास दुबे के कानपुर एनकाउंटर कांड ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को हिला कर रख दिया है। आठ पुलिस कर्मियों की मौत के जिम्मेदार विकास दुबे को फरार हुए चार दिन होने वाले हैं लेकिन पुलिस के हाथ खाली हैं। हम आपको विकास दुबे के राजनीतिक इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं। प्रदेश में सरकार बसपा की हो, सपा की हो या भाजपा की विकास का रसूख और दबदबा हमेशा कायम रहा।
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kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का राजनीतिक इतिहास भी चौंकाने वाला है। यह जिस पार्टी की सरकार रहती है उसी पार्टी के दमदार नेताओं के संपर्क में रहकर अपनी सुरक्षा करता है। सबसे ज्यादा राजनीतिक पकड़ इसको बसपा की सरकार में मिली। तब से लेकर विकास दुबे सपा के कई प्रमुख नेताओं और भाजपा के भी कुछ नेताओं के संपर्क में रह रहा था।
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भाजपा के एक राष्ट्रीय स्तर के नेता की वजह से भारतीय जनता पार्टी में उसकी घुसपैठ पिछले 2 साल से नहीं हो पा रही थी। इसको लेकर विकास दुबे ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक कई संपर्क निकालने की कोशिश की लेकिन भाजपा में उसकी घुसपैठ सीधे तौर पर नहीं हो पाई है, अभी भी वह इसके प्रयास में लगा हुआ था। भाजपा में घुसपैठ का इसका सीधा मतलब था कि वह अपनी सुरक्षा कर सके और अपने काले कारनामों को छुपा सके।
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बताया जा रहा है कि इससे अलग अपनी राजनीतिक पैठ बनाने के लिए विकास दुबे 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी भी कर रहा था और उसने भाजपा और बसपा दोनों पार्टियों पर अपनी निगाह लगा रखी है। करीबी सूत्रों के अनुसार वह रनिया से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इस बार चुनाव को लेकर पूरी तैयारी में था। कुछ दिनों पहले बदमाशों के हाथों मारे गए पिंटू सेंगर और विकास दुबे दोनों अगल-बगल की विधानसभा को लेकर बसपा से ही तैयारी में जुटे थे।
पिंटू सेंगर रसूलाबाद से और विकास दुबे रनिया से। विकास दुबे सबसे पहले उस समय चर्चा में आया जब शिवली में जूनियर हाई स्कूल के प्रिंसिपल से झगड़ा होने के बाद इसने उनका मर्डर कर दिया था। इसके बाद बसपा के कुछ नेताओं के बल पर इसने पुलिस से अपना बचाव भी कर लिया और अपना दबदबा भी बना लिया। इसके बाद वह एक के बाद एक हत्याओं में लिप्त होता चला गया।