आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी विकास दुबे का करीबी जय बाजपेई डेढ़ दशक पहले एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करता था। उसका भाई रजय चाय की दुकान चलाता था। इसी बीच जय शहर के एक विधायक के संपर्क में आया। उनका कारखास बना। विधायक की मेहरबानी से उसको ठेके मिलने लगे। ठेकेदारी से करोड़ों कमाए। ठेकेदारी की रकम को वो ब्याज पर देने लगा। वर्तमान में भी उसका करोड़ों रुपये ब्याज पर बंटा है, जिसका लाखों रुपये ब्याज हर महीने आता है। उसके बाद वो बीसी का काम करने लगा।
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जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
नेता के जरिये दहशतगर्द तक पहुंचा जय
पुलिस सूत्रों के मुताबिक नोटबंदी के दौरान जिस विधायक का कारखास था, उनकी बड़ी रकम जय ने पार दी। इसके बाद से विधायक ने उससे किनारा कर लिया। तब वो एक अन्य नेता के संपर्क में आया। इसने बदमाश विकास दुबे से मिलवाया। विकास उसके जरिये अपना पैसा ब्याज पर लगाने लगा। जय विकास से ढाई फीसदी पर रकम लेता और पांच फीसदी पर बांट देता। फिर उसने विकास के पैसों से प्रॉपर्टी भी खरीदी। एक तरह से वो साथ में काम करने लगा।
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विकास दुबे का साथी जय बाजपेयी
- फोटो : amar ujala
दो हजार से अधिक लोगों की बीसी चलाता है
जय करोड़ों रुपये की बीसी (बिजनेस कमेटी) चलाता है। इसमें शहर के कई बड़े नेता, उद्योगपति और कुछ अफसर भी शामिल हैं। जो पैसे लगाते हैं। हर महीने इससे उसकी लाखों रुपये की कमाई है।
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जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
अफसरों का चहेता, सुविधाएं मुहैया करता है
जय के शहर में कई मकान हैं। किराये पर न देकर एक-दो मकानों में वो बैठक करता है। एक तरह से दूसरे मकानों को ठिकाना बना रखा है। इसके अलावा अन्य मकानों को अधिकतर वो शहर में पोस्टिंग पाने वाले अफसरों को मुहैया करवाता है। इसके एवज में उनसे लाखों, करोड़ों के काम करवाता है।
असलहाधारियों को लेकर चलता है जय
जय को असलहों का बड़ा शौक है। जब भी कहीं जाता है तो सुरक्षा में कई लोगों को लेकर जाता है। कोई रायफल तो कोई पिस्टल लिए होता है। इससे संबंधित कई फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।