बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री कानपुर के रहने वाले हैं। पीसीएस में प्रदेश में 15वीं रैंक मिली थी। अलंकार परिवार में सबसे बड़े हैं। वहीं, यह बात भी सामने आई है कि अलंकार अग्निहोत्री ही नहीं, उनकी मां ने भी नौकरी से इस्तीफा दिया था।
यूजीसी में किए गए नियमों के बदलाव के विरोध में इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री कानपुर के रहने वाले हैं। 2019 बैच के पीसीएस अलंकार केशवनगर में रहते हैं। यूपी पीसीएस में उनकी 15वीं रैंक आई थी। वह परिवार में सबसे बड़े हैं। उनके तीन भाई और एक बहन हैं। सभी अलग-अलग स्थानों पर नौकरी करते हैं।
उनके चचेरे भाई राजेश कुमार ने बताया कि पिता विजय कुमार का निधन होने के बाद अलंकार की मां ने सभी को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाया। मां बैंक में नाैकरी करती थीं। अलंकार ने हाईस्कूल और इंटर किदवईनगर राष्ट्रीय विद्यालय से किया। फिर बीएचयू आईआईटी से बीटेक के बाद बंगलूरू में एक मल्टीनेशनल कंपनी में नाैकरी की। बाद वह प्रशासनिक सेवा में आ गए। उन्होंने बताया कि अलंकार जल्द ही कानपुर आएंगे।
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अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : अमर उजाला
'भाई ने जो भी फैसला लिया, वह बहुत सोच समझ के लिया है'
राजेश ने अलंकार के इस्तीफे पर कहा कि भाई ने जो भी फैसला लिया, वह बहुत सोच समझ के लिया है। वह यूजीसी में सवर्णों के साथ भेदभाव और प्रयागराज में ब्राह्मण बटुकों की चोटी खींचकर घसीटने और पीटने से आहत थे। इसी वजह से उन्होंने यह फैसला लिया। उनका यह फैसला युवाओं के लिए उठाया गया है।
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सोमवार रात कार से बाहर जाते निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट
- फोटो : अमर उजाला
'अलंकार ने जो कुछ किया है, ठीक किया है'
अलंकार के ताऊ सेवानिवृत्त विंग कमांडर एसके अग्निहोत्री का कहना है कि अलंकार ने जो कुछ किया है, ठीक किया है। वह पढ़ा लिखा समझदार है। पद से त्यागपत्र देने की वजह वह काफी आहत था। मैं उसकी जगह होता तो शायद यही करता।
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सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने दिया इस्तीफा
- फोटो : अमर उजाला
आत्मसम्मान में मां ने भी बैंक से दे दिया था इस्तीफा
ताऊ एसके अग्निहोत्री ने बताया कि उनका परिवार मूलरूप से उत्तरीपुरवा के ऊधो निवादा गांव रहने वाला है। नौकरी के चलते गांव छोड़कर शहर में आकर बस गए, लेकिन आत्मसम्मान के लिए कभी परिवार के सदस्यों ने कोई समझौता नहीं किया।
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समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट से लौटते निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : अमर उजाला
छोटे भाई विजय के निधन के बाद उनकी बहू गीता ने बैंक आफ बड़ौदा में 21 साल तक कैशियर के पद पर नौकरी की, लेकिन एक छोटी बात ने उनके मन को ऐसी ठेस पहुंचाई, उन्होंने सम्मान के लिए इस्तीफा देना ही बेहतर समझा। शायद यही वजह है कि उसी आत्मसम्मान के लिए उनके बेटे अलंकार भी इस्तीफा देकर ऐतिहासिक कदम उठाया है।
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कलेक्ट्रेट से जाते सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अपने समर्थको के साथ
- फोटो : अमर उजाला
यूजीसी बिल में सवर्णों की अनदेखी और शंकराचार्य का अपमान...सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के दिन अपने पद से इस्तीफा देकर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे में खलबली मचा दी। उन्होंने कहा कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए बिल में सवर्ण समाज के हित की अनदेखी और प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई से आहत हैं। ऐसा लग रहा है कि मौजूदा सरकार और प्रशासन साधु-संतों और ब्राह्मणों के खिलाफ काम कर रहा है। उन्होंने डीएम पर बंधक बनाने का भी आरोप लगाया।
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कलेक्ट्रेट से जाते सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अपने समर्थको के साथ
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि सोमवार की देर रात ही शासन ने उन्हें निलंबित कर शामली के जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया। मामले की जांच शासन स्तर से बरेली के मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी को सौंपी गई है। इस बीच निलंबन के दूसरे दिन मंगलवार को भी अलंकार का आक्रोश कम नहीं हुआ और समर्थकों संग वह पूरे दिन कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते रहे। उन्होंने डीएम अविनाश सिंह पर बंधक बनाने का आरोप भी लगाया हैं। फिलहाल वह पुलिस की निगरानी में अपने आवास में नजरबंद हैं।
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कलेक्ट्रेट का गेट बंद होने पर धरने बैठे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री व उनके समर्थन जुटे लोग
- फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल और भारत व राज्य निर्वाचन आयोग को ई-मेल से भेजे गए पांच पन्ने के इस्तीफे में अलंकार ने अपने वह चित्र भी साझा किए हैं, जिनमें वह सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के नाम और कार्यकाल वाले बोर्ड पर अपने नाम के सामने अंग्रेजी में रिजाइन लिख रहे हैं। दूसरे चित्र में वह यूजीसी रोल बैक, काला कानून वापस लो... के पोस्टर लेकर अपने सरकारी आवास के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।
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कलेक्ट्रेट का गेट बंद होने पर धरने बैठे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री व उनके समर्थन जुटे लोग
- फोटो : अमर उजाला
आरोप-डीएम के फोन पर लखनऊ के एक अधिकारी ने कॉल कर आपत्तिजनक शब्द कहे
सोमवार सुबह गणतंत्र दिवस पर कलक्ट्रेट में झंडा फहराने के बाद सरकारी आवास पहुंचते ही 2019 बैच के पीसीएस अफसर अलंकार ने अपने इस्तीफा देने की बात सार्वजनिक कर दी थी। इस्तीफा भेजने के बाद अलंकार मुखर हो गए थे और यूजीसी बिल लागू होने और शंकराचार्य के अपमान पर वह केंद्र-राज्य सरकार को घेरने लगे थे। फिर देर शाम डीएम से मिलने उनके आवास गए थे। वहां से बाहर निकलने पर उन्होंने डीएम आवास में 45 मिनट तक बंधक बनाए रखे जाने का आरोप लगाया।
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कलेक्ट्रेट में डीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री व उनके समर्थन
- फोटो : अमर उजाला
साथ ही उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि डीएम के फोन पर लखनऊ के एक अधिकारी ने कॉल कर उनके लिए आपत्तिजनक शब्द कहकर कहा कि पंडित पागल हो गया है। इसे रातभर डीएम आवास में ही बंधक बनाकर बैठाए रखो... और दो घंटे में आवास खाली करा लो। सिटी मजिस्ट्रेट ने अपनी जान का खतरा बताकर जैसे-तैसे डीएम आवास से निकलकर आने की भी बात कही। अलंकार ने सोमवार रात में ही सरकारी आवास से कुछ सामान ट्रक में लोड किया, लेकिन रात में वह उसी आवास में ठहरे।
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समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट से लौटते निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : अमर उजाला
सुबह होते ही अलंकार अग्निहोत्री ने समर्थकों की सरकारी आवास में ही बैठक बुलाई, लेकिन पुलिस की सख्ती से वह बैठक नहीं कर पाए। इसके बाद सुबह 11.23 बजे से शाम 4.44 बजे तक वह आवास से लेकर कलक्ट्रेट तक समर्थकों संग प्रदर्शन करते रहे। कलक्ट्रेट गेट पर जमीन पर बैठकर घंटे भर तक धरना दिया। फिर डीएम कार्यालय के सामने समर्थकों संग जमकर नारेबाजी की। डीएम के मौजूद न होने पर वह अपराह्न 3.30 बजे फिर समर्थकों साथ कलक्ट्रेट पहुंचे और नारेबाजी की, मगर लेकिन से मुलाकात नहीं हो पाई थी।
कलक्ट्रेट में धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : संवाद
जनतंत्र है और न ही गणतंत्र, बस भ्रमतंत्र है
बीएचयू आईआईटी से बीटेक उत्तीर्ण अलंकार के इस्तीफा के अंतिम पैरा में लिखा है कि केंद्र-राज्य सरकार में न ही जनतंत्र है और न ही गणतंत्र है, बस भ्रमतंत्र है...। देश में अब देशी सरकार नहीं, विदेशी जनता पार्टी की सरकार है...।