बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री की सफलता के पीछे एक लंबी कहानी है। उनके पिता बचपन में ही गुजर गए थे। उन्होंने अपने छोटे भाई, बहनों के लिए प्राइवेट नौकरी भी की थी। भाई-बहनों के अपने पैरों पर खड़े होने के बाद उन्होंने प्राइवेट नौकरी छोड़कर पीसीएस की तैयारी की और पहली बार में ही सफलता हासिल की।
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bareilly city magistrate resign
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
बरेली में पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने भले ही सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा दे दिया हो, पर उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है। करीब 10 साल की अवस्था में ही उनके पिता का निधन हो गया था। सिर से पिता का साया उठने के बाद अलंकार तमाम बाधाओं से जूझते हुए सिविल सेवा की तैयारी की थी और पहले ही प्रयास में यूपीपीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी।
इसी के साथ वह डिप्टी कलेक्टर बन गए थे। इससे पूर्व उन्होंने अपने छोटे भाई, बहनों के लिए प्राइवेट नौकरी भी की थी। भाई-बहनों के अपने पैरों पर खड़े होने के बाद उन्होंने प्राइवेट नौकरी छोड़कर पीसीएस की तैयारी की और पहली बार में ही सफलता हासिल की।
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सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : संवाद
अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। उनके जीवन का संघर्ष कम उम्र में ही शुरू हो गया था। जब वे साढ़े दस वर्ष के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया। घर के सबसे बड़े बेटे होने के नाते उन पर जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ था। उनकी माता गीता अग्निहोत्री ने कठिन परिस्थितियों में भी उनकी परवरिश और शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी।
पिता के निधन के बाद करियर के साथ ही परिवार का रखा पूरा ध्यान
सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने पिता की मौत के बाद अपने करियर के साथ ही पूरे परिवार का ध्यान रखा। उन्होंने कानपुर में ही 12वीं तक की पढ़ाई की। वह पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में उन्होंने प्रदेश में 21वां स्थान प्राप्त किया था।
इसके बाद उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बी-टेक किया था। इसके बाद सिविल सेवा में जाना चाहते थे। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए आईटी कंपनी में कंसल्टेंट की नौकरी ज्वाइन की।
अलंकार की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी
अलंकार अग्निहोत्री की सफलता के पीछे एक लंबी कहानी है। वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और पत्नी आस्था मिश्रा को देते हैं। उन्होंने बताया था कि एक विवाहित व्यक्ति के लिए नौकरी छोड़कर तैयारी करना जोखिम भरा था, इसलिए उन्होंने एक साल की पगार बचाकर रुपए इकट्ठा किए थे, ताकि अगले 2-3 साल तक परिवार को आर्थिक समस्या का सामना न करना पड़े।
यूपी पीसीएस परीक्षा में कानपुर के अलंकार अग्निहोत्री ने 15वीं रैक हासिल की थी।
अलंकार ने पहले ही प्रयास में पास कर ली थी यूपी पीसीएस परीक्षा।
अलंकार ने यूपीपीएससी की तैयारी से पहले 10 साल तक आईटी सेक्टर में कन्सल्टेंसी की जॉब भी की।
वर्ष 1998 में यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में अलंकार को 21वां स्थान मिला था।
12वीं पास करने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने बनारस विश्वविद्यालय से बीटेक किया और नौकरी करने लगे थे।
वर्ष 2014 में जब अलंकार के सभी छोटे भाई-बहन सक्षम हो गए और बहन की शादी हो गई, तब प्राइवेट नौकरी छोड़कर यूपीपीसीएस की तैयारी शुरू की थी।
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अलंकार अग्निहोत्री ने अपने नाम के आगे लिखा रिजाइन
- फोटो : सोशल मीडिया
इस्तीफे में क्या लिखा?
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफा में उत्तर प्रदेश सिविल सेवा वर्ष 2019 बैच का अपने को राजपत्रित अधिकारी बताया है। साथ ही उन्होंने अपनी शिक्षा दीक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में होने का जिक्र किया है। उन्होंने सीधे राज्यपाल को संबोधित करते हुए कहा है कि प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द एवं उनके शिष्य, बटुक, ब्राह्मणों से स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की।
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डीएम आवास पर जाते सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री
- फोटो : अमर उजाला
वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा को पकड़कर घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया, चूंकि चोटी/शिखा ब्राह्मण, साधु संतों का धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक है और मैं (अलंकार अग्निहोत्री) स्वयं ब्राह्मण वर्ग से हूं।
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सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से फोन पर बात की ।
- फोटो : अमर उजाला
पत्र में आगे लिखा है कि प्रयागराज की घटना से यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्मणों का अपमान किया गया है। अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा है कि प्रयागराज में हुई घटना एक चिंतनीय एवं गंभीर विषय है और ऐसे प्रकरण इस सरकार में होना एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है।
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सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के आवास पर जुटे लोग
- फोटो : अमर उजाला
इस प्रकरण से यह प्रतीत होता है कि स्थानीय प्रशासन एवं वर्तमान की राज्य सरकार एक ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है एवं साधु संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है।
पोस्टर के साथ तस्वीर वायरल
अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि वह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई से आहत हैं। साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए कानून का विरोध भी किया। इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोमवार को सोशल मीडिया पर सामने आई है, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े दिखाई दे रहे हैं।
bareilly city magistrate resign
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पोस्टर में लिखा है कि हैशटैग यूजीसी रोल बैक..., काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान। वहीं, सोमवार शाम को सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री डीएम आवास पर पहुंचे। डीएम आवास में वह करीब एक घंटा तक रहे। इसके बाद बाहर निकले तो अलंकार अग्निहोत्री ने जिला प्रशासन पर ही बड़ा आरोप लगा दिया।