उन्नाव जनपद में जनाधार वाले नेता रहे दिवंगत पूर्व मंत्री व सांसद मनोहर लाल की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने रथनुमा बस से बुधवार को यहां पहुंचे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि शुक्लागंज में उनकी सरकार ने ट्रांसगंगा सिटी की आधारशिला रखी थी। उद्देश्य था कि लोगों को रहने और रोजगार के अवसर मिलेंगे लेकिन भाजपा सरकार ने सिटी के किनारे लाशें बहा दीं।
राज्यसभा में केंद्र कह रहा है कि कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई जबकि ऑक्सीजन न मिलने पर बड़ी संख्या में गरीबों की जान चली गई। सरकार मौतों का आंकड़ा छिपा रही है। अखिलेश ने पंचायत चुनाव में अंधेरगर्दी और मनमानी का भी सरकार पर आरोप लगाया। उन्होंने चुटकी लेते हुए यह तक कह दिया कि बाबा मुख्यमंत्री न लैपटॉप चला पाते हैं और न ही बिजली कारखानों की जानकारी रखते हैं।
विज्ञापन
2 of 5
उन्नाव में अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
यही कारण है कि प्रदेश में नए बिजली उत्पादन प्लांट नहीं लग पाए। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में चुनाव में गठबंधन के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि सपा सबको साथ लेकर चलेगी। बड़े दलों की जगह छोटों से गठबंधन करेंगे। अखिलेश के दौरे को सियासी गलियारों में चुनावी यात्रा का शुभारंभ माना जा रहा है।
विज्ञापन
3 of 5
अखिलेश यादव के साथ अनु टंडन
- फोटो : amar ujala
साल 2012 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने चुनावी रथ यात्रा की शुरुआत उन्नाव से ही की थी। चुनाव परिणाण सपा के पक्ष में गए और अखिलेश मुख्यमंत्री बने। मुलायम सिंह भी अपनी चुनावी दौरे में उन्नाव को सियासी नजरिए से काफी महत्व देते रहे हैं। अखिलेश ने इस कार्यक्रम के बहाने पार्टी के परंपरागत वोट बैंक को सहेजने की कोशिश भी की।
4 of 5
अखलेश का जोरदार स्वागत हुआ
- फोटो : amar ujala
मनोहर लाल ने अखिल भारतीय लोधी, निषाद, बिंद, कश्यप एकता महासभा की स्थापना की थी। उनके बेटे व पूर्व विधायक रामकुमार इस समय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। मनोहर लाल 1985, 1989, 1993 में उन्नाव सदर से विधायक रहे। 1995 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके छोटे बेटे दीपक कुमार उनकी सीट से ही विधायक चुने गए।
अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना
- फोटो : amar ujala
1998 में लोकसभा चुनाव जीत गए तो उनकी सदर सीट से बड़े भाई रामकुमार विधायक निर्वाचित हुए। दीपक 2007 और 2012 में भी विधायक चुने गए। महासभा का विस्तार पूरे प्रदेश में होने से सपा को चुनावों में इसका काफी फायदा मिला। इस समीकरण से सपा के लिए इस परिवार की सियासी अहमियत है।