चित्रकूट राजापुर इलाके में स्थित प्राचीन संकट मोचन हनुमान मंदिर की मूर्ति गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित की गई थी। वही मंदिर यमुना नदी के पानी के कटाव के कारण आज गिरने की कगार पर पहुंच गया है। मंदिर में हनुमान जयंती में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
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गोस्वामी तुलसी दास की जन्मस्थली राजापुर में बने प्राचीन संकट मोचन हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि गोस्वमी तुलसीदास नांदी तौरा के हनुमान मंदिर में प्रतिदिन दर्शन करने के लिए जाते थे। एक दिन बारिश होने व नाले के बहाव के कारण दर्शन करने नहीं जा सके। जिससे उन्होंने राजापुर कस्बे में यमुना नदी के किनारे एक टीले पर पत्थर से चंदन से हनुमान जी की आकृति बना कर पूजा अर्चना करने लगे।
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एक दिन पूजा के उपरांत चंदन द्वारा बनाई गई। आकृति को मिटाना भूल गये। दूसरे दिन उस स्थान पर संत तुलसी पहुंचे तो चंदन द्वारा बनाई गई आकृति का उभार आ गया जो मिटा नहीं। तब से तुलसी दास यहीं पर पूजा करने लगे। स्थानीय समाजसेवी शिवशंकर सिंह, सुभाष अग्रवाल व शिवपूजन गुप्ता ने बताया कि मंदिर यमुना नदी के किनारे बना हुआ है। जिससे पानी के बहाव के कारण मंदिर की बनी दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
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समय रहते टीले के पास दीवार नहीं बनाई गई तो मंदिर गिर सकता है। मंदिर के पुजारी रामप्रकाश, लखनकुमार व हरिमोहन ने बताया कि उनके परिजन भी यहां पूजन कराते रहे हैं। मंदिर में पुजारियों की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगती है।
भगवान श्री हनुमान की जयंती पर्व पर धर्मनगरी के बरहा के हनुमान मंदिर, शिवरामपुर स्थित लैना बाबा मंदिर, नांदी के हनुमान मंदिर, सहित कई मंदिरों में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।