तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाला सनकी डॉक्टर बेहद शातिर भी है। इसलिए वह वारदात को अंजाम देने के बाद अपार्टमेंट से अटल घाट तक पैदल पहुंचा। न किसी से कोई बातचीत की और न ही कोई सवारी पकड़ी।
ऐसा उसने इसलिए किया ताकि कोई सुबूत किसी के हाथ न आए। अगर वह किसी की मदद लेकर या किसी सवारी से अटल घाट जाता तो उसको पहुंचाने वाले के जरिये पुलिस तमाम जानकारियां हासिल कर लेती।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हत्यारोपी डॉक्टर कितना शातिर है। वारदात के बाद पुलिस ने डिविनिटी होम्स अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले थे तो उसे पता चला था कि सुशील दोपहर 1:27 बजे अपार्टमेंट से बाहर निकला था।
यहां से वह बैराज जाने वाले मार्ग की तरफ मुड़ा था। पुलिस ने एक के बाद एक सैकड़ों कैमरों के फुटेज देखे। फुटेज के जरिये अपार्टमेंट से लेकर बैराज तक के कई किमी के रास्ते को पुलिस ने ट्रेस किया।
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मौके पर मौजूद पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
जिसमें सुशील पैदल जाते हुए नजर आ रहा है। करीब दो घंटे तक वह पैदल चलकर दोपहर 3:27 बजे अटल घाट पहुंचा। इस दौरान उसने किसी से कोई संपर्क नहीं किया। किसी को कोई बातचीत नहीं की।
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kanpur triple murder
- फोटो : amar ujala
चंद मिनट के लिए ऑन किया था फोन
सुशील के मोबाइल नंबर की सीडीआर से पता चला है कि वारदात को अंजाम देने के बाद करीब दो बजे सुशील ने ट्यूशन टीचर को फोन किया था। उसको घर से आने से मना कर दिया था। उसके बाद तत्काल मोबाइल बंद कर दिया था।
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kanpur triple murder
- फोटो : amar ujala
अटल घाट पर उसने शाम करीब 5:31 बजे पर मोबाइल ऑन किया। 5:32 बजे भाई को मैसेज किया। उसके बाद फिर मोबाइल बंद कर दिया। अगर मोबाइल कुछ देर और ऑन रहता या वह किसी से बातचीत करता तो सर्विलांस टीम उसको ट्रेस करने में जल्द कामयाब होती।
कूदता तो किसी को तो दिखता, शव भी मिलता
अटल घाट में जिस वक्त सुशील जाता दिख रहा है उस वक्त सैकड़ों लोग घाट पर मौजूद दिख रहे हैं। जब वह सवा पांच बजे घाट के अंदर किनारे चलाता है तब भी तमाम लोग वहां थे। अगर उस वक्त या उससे कुछ देर बाद नदी में कूदता तो घाट पर मौजूद लोगों के अलावा सुरक्षाकर्मी व गंगा प्रहरियों की नजर में जरूर आता। यह आशंका पुलिस अफसरों के मन में भी है।