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दीवार बनी काल, तीन बहनों को सुला दिया मौत की नींद, एक साथ तीनों को दफनाया गया, हर आंख से छलके आंसू

Sun, 30 Aug 2020 09:19 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
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मृतक बहनों की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट जिले में रैपुरा थाने के सिंहपुर ग्राम पंचायत के मजरे कपुरी गांव में शनिवार को कच्ची दीवार ढहने से मलबे में दबकर तीन सगी बहनों की मौत होने के दूसरे दिन रविवार को तीनों के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद गांव में ही तीनों को एक स्थान पर एक साथ दफनाया गया। इस दौरान वहां मौजूद हर आंख से आंसू छलक  गए।

गांव में मातम छाया रहा। कई घरों में चूल्हे नहीं जले। जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय ने बताया कि दैवीय आपदा के तहत परिवार को 12 लाख की सरकारी सहायता देने का पत्र लेखपाल के माध्यम से परिवार के सदस्यों को सौंपा गया है। वहीं राजनीतिक दलों के नेता भी पहुंचे और परिवार के सदस्यों को सांत्वना दी।
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दीवार ढहने से तीन बहनों की मौत - फोटो : अमर उजाला
कपुरी गांव के निवासी अशोक कुमार वर्मा की रीतू (12), शिवदेवी (9), पूजा, (5) की दीवार गिरने से शनिवार को मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव गांव पहुंचे तो महिलाएं दहाड़ मार कर रोने लगीं। दाह संस्कार में गांव के साथ ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
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बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला
पूर्व मानिकपुर के भाजपा विधायक आनंद शुक्ला, पूर्व विधायक चंद्रभान सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष राम लखन सिंह व सपा जिलाध्यक्ष अनुज यादव सहित कई समाजसेवियों ने पीड़ित परिवार के सदस्यों से मिलकर सांत्वना दी। प्रधान होरी लाल, उप जिलाधिकारी मऊ राजबहादुर, सीओ इश्त्यिाक अहमद, रैपुरा थाना प्रभारी धर्मराज सिंह व लेखपाल अरवाज ने परिजनों को आश्वस्त किया गया है कि सरकारी सहायता जल्द दिलाई जाएगी।

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गमगीन परिजन - फोटो : अमर उजाला
घर के आगे की दीवार बनीं काल
रैपुरा थाना क्षेत्र के कपुरी गांव में शनिवार की शाम को दीवार गिरने से तीन सगी बहनों की मौत हो गई थी। रविवार को भी गांव में शोक का माहौल रहा। परिजनों का रो-रोकर बुराहाल था। हालांकि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई दीवार ही उनके लिए काल बन गई।

ग्राम प्रधान हीरालाल ने बताया कि अशोक कुमार को एक वर्ष पूर्व ही सरकारी योजना के तहत आवास व शौचालय आवंटन हुआ था। आवास पूरा तैयार है लेकिन परिजनों ने घर के आगे छह फिट ऊंची व आठ फिट लंबी मिट्टी की दीवार बना ली थी। दरअसल घर सड़क के पास स्थित है। बच्चे या मवेशी सड़क पर न जाएं इसी लिए इस दीवार को परिजनों ने बनाया था। उनका कहना है कि किसी को आभास नहीं था कि मकान के बाहर बनी दीवार तीनों बहन रीतू, शिवदेवी और पूजा के लिए काल बन जाएगी। 
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गमगीन बैठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
अगले महीने पिता को जाना था सूरत
मृतक बेटियों के पिता अशोक कुमार के पास करीब तीन बीघे जमीन है। जिससे पूरे घर परिवार का भरण पोषण नहीं हो पाता है। इसी कारण गांव की जमीन पर खेती का काम अशोक के पिता  देखते हैं। और खुद अशोक सूरत में जाकर मजदूरी करता था। लाक डाउन के चलते वह पांच माह से गांव में ही है। सितंबर में उसे काम के लिए सूरत जाना था।
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