शोपियां में आतंकियों की गोलियां का शिकार हुए दन्नापुरवा के रामसागर और मुनेश के परिजन दीपावली त्योहार पर उनके घर लौटने का इंतजार कर रहे थे। मगर दोनों परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं। कश्मीर गए गांव के अन्य लोग जो अभी लौटे नहीं हैं, उनके घरवालों की सांसें अटकी हुई हैं। दरअसल, मंगलवार की सुबह जब मुनेश की पत्नी पुष्पा देवी की झोपड़ी पर सूरज की किरण पड़ी, तो बच्चों को उठाते हुए पुष्पा ने कहा पापा कश्मीर से आज निकल पड़े और वह जल्द घर आ जाएंगे। थोड़ी ही देर बाद कश्मीर से जेठ रामबाबू की कॉल आई। रामबाबू ने बताया कि आतंकी हमले में छोटे भाई मुनेश और रामसागर की मौत हो गई, जबकि खुद और पड़ोसी भोला व मोनू घायल हो गए। यह सुनते ही घर में कोहराम मच गया।
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विपाल करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
पुष्पा ने बताया कि रात करीब 10 बजे पति मुनेश से मोबाइल पर बात हुई थी। पति ने कहा था सुबह चार बजे वह लोग ट्रक से बैठकर घर के लिए निकलेंगे। पड़ोसी पिंटू और विनय ठेकेदार के पास हिसाब-किताब करने गए हैं।
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मृतक मुनेश का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
एक माह की कमाई से चलता सालभर का खर्च
गोलियों की आवाज से अक्सर नींद टूटने वाले शोपियां में कोई भी रहना पसंद नहीं करता पर यहां की एक माह की कमाई से कन्नौज के दन्नापुरवा गांव के 30 परिवारों का सालभर का खर्च चलता है। हर साल की तरह इस बार भी गांव से 30 लोग गए थे। इनमें से 23 ग्रामीण करवाचौथ वाले दिन लौट आए थे।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
हिसाब-किताब न होने से सात ग्रामीण वहीं पर रुके थे। अब इनमें से दो के शव आ रहे हैं। इस बार 28 अगस्त को ठठिया थाना क्षेत्र के अति पिछड़े गांव दन्नापुरवा से रामसागर, मुनेश, रामबाबू, भोला, मोनू, पिंटू, विनय, क्षत्रपाल, नन्हें, अंकित, दीपक, शैलेंद्र, आलोक, किशोर, भोला, सुनील, राजन, जय सिंह समेत 30 लोग जम्मू-कश्मीर के शोपियां के बागानों में मजदूरी करने गए थे।
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गमगीन परिजन
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के ठेकेदार सोमू की ओर से बाग में प्रति पेटी भरने और ट्रक में लादने का 10 रुपये मिलता था। ये श्रमिक 15 घंटे काम कर छह से सात सौ रुपये प्रतिदिन कमाते थे। घर लौटे श्रमिक सुनील और राजन ने बताया कि शोपियां में अक्सर आतंकी गोलाबारी करते हैं।
इस कारण वहां पर रहना कोई पसंद नहीं करता था। हम लोग हिम्मत जुटाकर एक से डेढ़ माह में 30 से 35 हजार रुपये कमाकर घर चले आते हैं। इस कमाई से सालभर घर का खर्च चलाते।