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विकास दुबे का खजांची जय कैसे बना गैंगस्टर फिर पहुंचा जेल, अब पत्नी श्वेता रिहाई के लिए दर-दर भटक रही

Wed, 28 Oct 2020 01:12 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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जय बाजपेयी पत्नी श्वेता एवं विकास दुबे - फोटो : amar ujala
कानपुर के बिकरू में पुलिसकर्मियों के साथ हुई बर्बरता के बाद पुलिस ने सात दिन के अंदर उज्जैन से कानपुर लाते समय विकास दुबे का एनकाउंटर कर दिया। विकास दुबे की मौत के बाद पुलिस महकमे की कई ऐसी चीजें सामने आईं जिन्होंने पुलिस प्रशासन को हिलाकर रख दिया। दुर्दांत विकास दुबे के ढेरों किस्सों में सबसे दिलचस्प कहानी उसके खजांची जयकांत बाजपेई उर्फ जय बाजपेई की है। ग्लैमरस लाइफस्टाइल जीने वाला जय बाजपेई अब जेल में है। उसे रिहा कराने के लिए पत्नी श्वेता दर दर भटक रही है।
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जय को रिहा कराने के लिए दर दर भटक रही श्वेता - फोटो : amar ujala
श्वेता का कहना है कि उसका पति निर्दोष है। ऐसे में हम आपको आज जय बाजपेई की जिंदगी से रूबरू कराने जा रहे हैं। जो व्यापारी से गैंगस्टर बना और फिर कैसे यूपी के सबसे खतरनाक कांड का हिस्सा बन गया। बिकरू हत्याकांड के 36 आरोपी जेल में है और विकास दुबे समेत 6 बदमाश एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। बिकरू कांड के बाद सबसे ज्यादा सुर्खियां विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई ने बटोरी हैं। जय बाजपेई की अर्श से फर्श पर पहुंचने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। बिकरू कांड के बाद जय बाजपेई को लोग विकास दुबे के खजांची के नाम से जानने लगे।
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जय बाजपेयी, डीआईजी अनंत देव - फोटो : amar ujala
जय बाजपेई का नाम बिकरू कांड में आने से उसके करीबियों की भी मुश्किलें बढ़ गईं। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने बीते 2 जुलाई की रात अपने गुर्गो के साथ मिलकर पुलिस टीम पर घात लगाकर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस फायरिंग में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और 6 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। बीते 3 जुलाई की दोपहर विजय नगर चौराहे से जय बाजपेई की तीन लग्जरी कारें लावारिस हालत में पाई गई थीं। पुलिस की मानें तो इन कारों का इस्तेमाल विकास दुबे और उसके गुर्गों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए होने वाला था।


 

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विकास दुबे का साथी जय बाजपेयी - फोटो : amar ujala
पुलिस की सक्रियता के कारण ये गाड़ियां पकड़ ली गई थीं। यहीं से जय बाजपेई पुलिस की रडार पर आ गया था। विकास दुबे का खजांची जय बाजपेई 10 साल पहले नजीराबाद थाना क्षेत्र में एक छोटे से मकान में रहता था और प्रिंटिंग कारखाने में काम करता था। कहा जाता है कि इसी बीच जय हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के सपंर्क में आ गया। दरअसल, विकास दुबे का गांव और जय का गांव आसपास है। जय बाजपेई हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की ब्लैकमनी को व्हाइट करने का काम करता था। इस काम में उसके तीनों भाई उसका साथ देते थे।
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विकास दुबे के साथ जय बाजपेयी - फोटो : amar ujala
जय बाजपेई विकास दुबे का पैसा रियल स्टेट, जमीनों की खरीद फरोख्त, सरकारी जमीनों पर कब्जा करने में लगाता था। जय और उसके भाइयों ने अपराध के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित की थी।हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के संरक्षण में जय और उसके भाइयों ने अपराध के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित की थी। जय के पास कानपुर में 10 से अधिक मकान, कई फ्लैट, 6 लग्जरी गाड़ियां हैं। यही नहीं, जिस मकान में जय बाजपेई रहता था वह हर तरह की सुख सुविधा से लैस था। विकास दुबे का करोड़ों रुपया जय बाजपेई ने ब्याज पर बांट रखा था।
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जय बाजपेयी के साथ डांस करता विकास दुबे - फोटो : amar ujala
उसकी लग्जरी लाइफ स्टाइल देखकर पुलिस महकमे के आलाधिकारी से लेकर थाने के पुलिसकर्मी उसकी आवभगत में लगे रहते थे। उसके एक मकान में कई पुलिसकर्मी भी रहते थे। जिन्हें बिकरू कांड के बाद निलंबित किया गया था। बिकरू हत्याकांड के बाद से विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। बीते तीन जुलाई को जब विजय नगर चौराहे से जय बाजपेई की तीन लग्जरी कारें पकड़ी गई थीं। पुलिस की जांच में यह बात निकल कर सामने थी कि तीन कारों का इस्तेमाल विकास दुबे और गुर्गो को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए होने वाला था।



 
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जय की पत्नी श्वेता - फोटो : amar ujala
जब पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने अपने खजांची जय बाजपेई को बीते 01 जुलाई को फोन कर गांव आने के लिए कहा था। जय बाजपेई अपने साथी प्रशांत शुक्ला के साथ बीते 2 जुलाई की दोपहर बिकरू गांव पहुंचा था। जय बाजपेई ने विकास दुबे को 25 लाइसेंसी कारतूस, रिवॉल्वर और दो लाख रुपए दिए थे। बीते 20 जुलाई को नजीराबाद पुलिस ने प्रशांत शुक्ला और जय बाजपेयी को गिरफ्तार कर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा था।

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जय की पत्नी श्वेता - फोटो : amar ujala
जय बाजपेई समेत उसके तीनों भाइयों पर 31 जुलाई को नजीराबाद थाने में गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई थी। जय के तीनों भाई अजयकांत, रजयकांत और शोभित बिकरू कांड के बाद से फरार चल रहे थे। पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिशें दे रही थी। गैंगस्टर की कार्रवाई होने के बाद पुलिस ने तीनों भाइयों पर 25 हजार का इनाम रखा था। पुलिस ने बीते 01 सितंबर को तीनों भाइयों के घर के बाहर मुनादी पिटवाकर 82 की कार्रवाई का नोटिस चस्पा किया था।
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विकास दुबे का खजांची - फोटो : अमर उजाला
बीते 4 सितंबर को अजयकांत, रजयकांत और शोभित ने कानपुर की गैंगस्टर कोर्ट में अधिवक्ताओं की पोशाक में कोर्ट में सरेंडर किया था। कानपुर पुलिस ने जय बाजपेई और उसके भाइयों द्वारा अर्जित की गई संपत्ति को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें जब्तीकरण को लेकर भी विवरण दिया गया था और यह कहा गया था कि जय और उसके भाइयों ने अपराध के जरिए संपत्ति अर्जित की गई है। पुलिस ने रिपोर्ट बनाकर डीएम आलोक तिवारी को सौंपी थी। इस रिपोर्ट पर डीएम ने संपत्ति जब्त करने का आदेश दे दिए थे। इन संपत्तियों में 8 भवन व भूखंड, 5 बाइकें, एक स्कूटी और 6 लग्जरी कारें शामिल थीं। जिला प्रशासन ने जय बाजपेई की संपत्ति को जब्त कर लिया था।
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