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कुलदीप सेंगर के कांग्रेसी से भाजपा के बाहुबली विधायक बनने की कहानी, जेल जाने के बाद भी कायम रहा रसूख

Wed, 31 Jul 2019 03:47 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा अनुराग मिश्रा, अमर उजाला, कानपुर
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कुलदीप सिंह सेंगर (फाइल फोटो)
दुष्कर्म के आरोप में जेल जाने के बाद भी उसका रसूख और दबदबा पूरे जिले में कम नहीं हुआ। कांग्रेस पार्टी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले साधारण युवक ने खुद को उन्नाव में एक नहीं चार बार बाहुबली विधायक के रूप में स्थापित किया। रूतबा ऐसा कि जिस पार्टी से भी चुनाव लड़े जीत पक्की। हम आपको उन्नाव दुष्कर्म कांड के मुख्य आरोपी भाजपा से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के 25 सालों के सफर के बारे में बताने जा रहे हैं। 
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कुलदीप सिंह सेंगर पुलिस हिरासत में (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
कुलदीप सिंह सेंगर का राजनीतिक सफर ग्राम पंचायत की सियासत से शुरू हुआ था। ननिहाल (माखी गांव) में बसे कुलदीप की जन्मस्थली जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल है। एक बार गांव के प्रधान रहे कुलदीप ने युवा कांग्रेस से सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। सभी दलों में अच्छी पैठ के बूते वह लगातार चौथी बार विधायक हैं।

 
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कुलदीप सिंह सेंगर
कुलदीप ने पच्चीस साल में खड़ा किया सियासी साम्राज्य
राजनीतिक रसूख ही है कि दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज होने, जेल जाने और सीबीआई की जांच जारी होने के बाद भी उनका क्षेत्र में दबदबा कायम रहा। यही नहीं इस मुद्दे पर गैर भाजपाई दलों के घेरने पर अब कुलदीप के भाजपा से निलंबन की कार्रवाई हुई है। विधायक का उनका दर्जा बरकरार है। कुलदीप सेंगर के पिता मुलायम सिंह मूल रूप से फतेहपुर जिले के निवासी थे।
 

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कुलदीप सिंह सेंगर को ले जाती पुलिस (फाइल फोटो)
जब जिस दल में चाहा सदस्यता ली और लड़ा चुनाव
नाना वीरेंद्र सिंह का कोई बेटा नहीं था। केवल दो बेटियां चुन्नी देवी और सरोजनी देवी ही हैं। चुन्नी देवी शादी के बाद से अपने परिवार समेत पिता के साथ रहने लगीं। उन्हीं के चार बेटों में कुलदीप सबसे बड़े, मनोज दूसरे नंबर के और अतुल तीसरे नंबर के हैं। कुलदीप के सबसे छोटे भाई विपुल सिंह की करीब दस साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। कुलदीप समेत सभी भाइयों का जन्म ननिहाल के गांव में हुआ।
 
 
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कुलदीप सिंह सेंगर (फाइल फोटो)
जेल जाने के बाद भी कायम रहा रसूख और क्षेत्र में दबदबा
कुलदीप सिंह 1996 में पहली बार ग्राम प्रधान चुने गए। इसके बाद पांच साल के दो कार्यकाल में माता चुन्नी देवी प्रधान रहीं। मौजूदा समय में छोटे भाई अतुल सिंह की पत्नी अर्चना सिंह ग्राम प्रधान हैं। वर्ष 2002 में कुलदीप ने बसपा से उन्नाव सदर सीट से पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और विधायक चुने गए। 2007 में उन्होंने सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक बने।

 
 
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कुलदीप सिंह सेंगर पर किशोरी ने लगाया था दुष्कर्म का आरोप (फाइल फोटो)
पंचायत चुनावों से शुरू किया था राजनीतिक सफर, चौथी बार विधायक बने
2012 में फिर सपा के टिकट पर भगवंतनगर से विधायक निर्वाचित हुए। 2016 में सपा में रहते हुए पार्टी से बगावत करके जिला पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी संगीता सेंगर को मैदान में उतार दिया। सपा में रहते हुए उन्होंने पार्टी के घोषित प्रत्याशी के खिलाफ पत्नी को न सिर्फ चुनाव लड़ाया बल्कि जीत भी हासिल की। विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी 2017 में कुलदीप सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया।
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भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर सीबीआई ने कसा था शिकंजा (फाइल फोटो)
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बांगरमऊ सीट से प्रत्याशी बनाया और वह लगातार चौथी बार विधायक निर्वाचित हुए। पत्नी संगीता सेंगर लगातार दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं और पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष है। इससे पहले छोटे भाई मनोज सिंह 2005 से 2010 तक मियागंज ब्लॉक के प्रमुख रहे।
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आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (फाइल फोटो)
दूसरी बार पुलिस की केस डायरी में आया नाम
बाहुबली विधायक कहे जाने वाले कुलदीप पर चुनाव के समय आचार संहिता उल्लंघन के मुकदमे को छोड़ दिया जाए तो सोमवार को रायबरेली में दर्ज हुआ दूसरा आपराधिक मुकदमा है। इतने बड़े राजनीतिक सफर में पहली बार अप्रैल 2018 में किशोरी से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था। तब पहली बार उनका नाम पुलिस की केस डायरी में चढ़ा था। हालांकि शहर व जिले की कई आपराधिक घटनाओं में उनकी शह या उनके गुर्गों के शामिल होने की बात सामने आई, लेकिन किसी ने रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई। कुलदीप सिंह को राजनीतिक प्रतिद्वंदियों और विरोधियों को शिकस्त देने में माहिर माना जाता हैं।
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