कानपुर में सीवेज के पानी को सिंचाई योग्य बनाने के लिए अपार्टमेंट, कॉलोनियों और गांवों में छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। प्लांट में गंदे पानी को शोधित किया जाएगा, फिर इस्तेमाल में लाया जाएगा। इससे न सिर्फ पानी की बर्बादी रुकेगी, बल्कि नदियों में गंदा पानी नहीं जा पाएगा।
केंद्र सरकार ने गंगा व अन्य सहायक नदियों में सीवेज को जाने से रोकने के लिए अपार्टमेंट, कालोनियों, गांवों में प्राइमरी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है। इसे मूर्तरूप देने के लिए सोमवार को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के डायरेक्टर जनरल जी अशोक कुमार ने जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) परिसर में नवनिर्मित सी गंगा इनोवेशन रिसर्च पार्क में पायलट प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया।
पार्क में तीन तकनीकों पर शोध होगा, इनमें से एक आईआईटी कानपुर की, दूसरी बेल्जियम और तीसरी इटली की तकनीक है। आईआईटी ने ही यह पार्क बनाया है। आईआईटी के सेंटर फॉर गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट एंड स्टडी के संस्थापक व आईआईटी के प्रोफेसर विनोद तारे की देखरेख में इस पार्क में तीन तकनीकों पर शोध शुरू किए गए हैं।