बिकरू कांड में जेल में बंद चौबेपुर थाने के निलंबित तत्कालीन एसओ विनय तिवारी की शुक्रवार को दूसरी जमानत याचिका भी विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित कोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने जमानत न देने का प्रमुख आधार अपराध की गंभीर प्रकृति माना है। दो जुलाई को चौबेपुर थाने के बिकरू गांव में कुख्यात विकास दुबे ने साथियों के साथ मिलकर पुलिस टीम पर गोलियां बरसा दी थी।
विज्ञापन
2 of 5
विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। पूरे घटनाक्रम में चौबेपुर थाने के तत्कालीन एसओ विनय तिवारी व हल्का इंचार्ज केके शर्मा पर विकास के खास होने के साथ दबिश की सूचना विकास दुबे तक पहुंचाने के आरोप लगे थे। इस मामले में दोनों को निलंबित कर दिया गया था। पुलिस ने एसओ व दरोगा को गिरफ्तार किया था।
विज्ञापन
3 of 5
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
दोनों माती जेल में बंद चल रहे हैं। इसकी सुनवाई स्पेशल जज डकैती रामकिशोर की अदालत में चल रही है। तत्कालीन एसओ के वकील ने दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की थी। शुक्रवार को सुनवाई हुई। तत्कालीन एसओ के वकील ने दलील दी कि विनय तिवारी ने पूर्व में कुख्यात विकास दुबे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वहीं दो जुलाई को घटना वाले दिन भी उन्होंने ही रिपोर्ट दर्ज कराई।
साथ ही उन्होंने हथियार व अन्य सामान भी बरामद कराया, लेकिन पुलिस अधिकारियों व मीडिया के दबाव में विनय तिवारी को आरोपी बना दिया गया। ऐसे में जमानत दी जाए। विपक्ष में दलील देते हुए सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा ने बताया कि घटना में पुलिस कर्मियों ने बयान दिए थे कि विनय तिवारी का विकास दुबे के घर आना-जाना था।
इसी तरह गांव के सुरेश वर्मा, रेखा अग्निहोत्री, क्षमा, खुशी ने भी विनय तिवारी व विकास के घर आने-जाने व मेलजोल होने के बयान दिए। ऐसे में तत्कालीन एसओ अपने कर्तव्य का पालन करने में असमर्थ रहे। घटना वाली रात पुलिस पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन मुठभेड़ के बाद पीछे हट गए। विनय तिवारी का अपराध गंभीर प्रकृति का है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विनय तिवारी की जमानत याचिका खारिज कर दी।