भगवान शिव की आराधना का माह सावन 28 जुलाई से शुरू हो रहा है। 19 साल बाद इस बार सावन 30 दिनों का होगा। यह 26 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा। वहीं, शनिवार से सावन का शुरू होना बेहद शुभ बताया जा रहा है।
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सावन में शिव के पूजन का विशेष महत्व है। पं. डॉ आदित्य पांडे ने बताया कि शनिवार के स्वामी शनिग्रह माने जाते हैं, जो कि शिव जी के प्रिय शिष्य है। इस कारण शनिवार से सावन का शुरू होना बेहद शुभकारी है। इस बार सावन में चार सोमवार शुभप्रद रहेंगे।
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28 जुलाई को श्रवण नक्षत्र और प्रीति योग में श्रावण मास की शुरुआत जनमानस के लिए शुभकारी होगी। पं विदुशेखर पांडे ने बताया कि सोमवार के दिन भगवान पर काले तिल, समुद्र फेन एवं शमि पत्र चढ़ाना शुभ होता है। जैसे विष्णु जी को अलंकरण प्रिय है, उसी प्रकार से शिवजी को अभिषेक प्रिय है।
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प्रदोष के दिन शिवजी पर गन्ने के रस और सोमवार के दिन गंगाजल और शहद से अभिषेक करने से मुक्ति मिलती है। भोले को प्रसन्न करने के लिए भक्त जल, दूध, दही से अभिषेक कर सकते हैं। इसके अलावा चंदन से ओंकार लिखना और बेलपत्र चढ़ाना पूजन के सरल विधानों में से एक है।
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पं आदित्य बताते हैं कि वैसे तो पूरे समय भगवान भोले का पूजन कर सकते हैं। हालांकि कुछ विशेष मुहूर्त में पूजन करना लाभप्रद होता है। उन्होंने बताया कि सुबह 7:15 से 8.55 बजे और दोपहर 3.35 से 8.15 बजे तक का मुहूर्त शुभ है।
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भोले को प्रसन्न करने के लिए इससे करे अभिषेक
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भोले को प्रसन्न करने के लिए इससे करे अभिषेक
- संतान प्राप्ति के लिए शहद से
- विवाह के लिए गन्ने के रस
- मनोकामना पूर्ति के लिए गंगा जल से
- व्यापार में वृद्धि के लिए दूध से
भोले को प्रसन्न करने के लिए इससे करे अभिषेक
- विद्यार्जन के लिए दूध और शहद के मिश्रण से
- कर्ज या ऋण मुक्ति के लिए गन्ने के रस और शहद के मिश्रण से
- असाध्य रोगों के लिए राब से